Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 506

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
म꣣न्द्र꣡या꣢ सोम꣣ धा꣡र꣢या꣣ वृ꣡षा꣢ पवस्व देव꣣युः꣢ । अ꣢व्या꣣ वा꣡रे꣢भिरस्म꣣युः꣢ ॥५०६॥

म꣣न्द्र꣡या꣢ । सो꣣म । धा꣡र꣢꣯या । वृ꣡षा꣢꣯ । प꣣वस्व । देवयुः꣢ । अ꣡व्याः꣢꣯ । वा꣡रे꣢꣯भिः । अ꣣स्म꣢युः ॥५०६॥

Mantra without Swara
मन्द्रया सोम धारया वृषा पवस्व देवयुः । अव्या वारेभिरस्मयुः ॥

मन्द्रया । सोम । धारया । वृषा । पवस्व । देवयुः । अव्याः । वारेभिः । अस्मयुः ॥५०६॥

Samveda - Mantra Number : 506
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(सोम) हे अमृतस्वरूप ! परमेश्वर ! वा ओषधे (वृषा) अमृतवर्षी, वा जलवर्षी (देवयुः) देवों = विद्वानों को चाहने वाला, वा वायु आदि देवों को चाहने वाला (अस्मयुः) और हमको चाहने वाला तू (वारेभिः) अपने वरणीय उत्तम गुणों से (अव्याः) हमारी रक्षा कर और (मन्द्रया धारया) गम्भीर अमृतधारा से वा जलधारा से (पवस्व) वृष्टि कर॥
Footnote
ऋग्वेद ९। ६। १ में (अव्यो वारेध्वस्मयु) पाठ है॥