Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 504

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- कश्यपो मारीचः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
वृ꣡षा꣢ सोम द्यु꣣मा꣡ꣳ अ꣢सि꣣ वृ꣡षा꣢ देव꣣ वृ꣡ष꣢व्रतः । वृ꣡षा꣣ ध꣡र्मा꣢णि दध्रिषे ॥५०४॥

वृ꣡षा꣢꣯ । सो꣣म । द्युमा꣢न् । अ꣣सि । वृ꣡षा꣢꣯ । दे꣣व । वृ꣡ष꣢꣯व्रतः । वृ꣡ष꣢꣯ । व्र꣣तः । वृ꣡षा꣢꣯ । ध꣡र्मा꣢꣯णि । द꣣ध्रिषे ॥५०४॥

Mantra without Swara
वृषा सोम द्युमाꣳ असि वृषा देव वृषव्रतः । वृषा धर्माणि दध्रिषे ॥

वृषा । सोम । द्युमान् । असि । वृषा । देव । वृषव्रतः । वृष । व्रतः । वृषा । धर्माणि । दध्रिषे ॥५०४॥

Samveda - Mantra Number : 504
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(देव) दिव्यगुणयुक्त ! (सोम) परमेश्वर ! वा सोमौषधे ! (वृषा असि) तू अमृत वर्षाने वाला, वा मेघ वर्षाने वाला है (वृषा) वीर्यदाता (वृषा) वीर्यवान् (द्युमान्) प्रकाश वाला (वृषव्रतः) श्रेष्ठ कर्म वाला, वा यज्ञ वाला तू (धर्माणि दध्रिषे) धर्मयुक्तकर्मों, वा यज्ञों का धारण करता है।
सब यज्ञ वा अन्य उत्तम कर्म, परमेश्वर के अनुग्रह और सोमादि ओषधियों के प्रयोग से सिद्ध होते हैं, तथा सब प्रकार का बल और वीर्य प्राप्त होता है।
Footnote
ऋ० ९। ६४। १ में (दधिषे) पाठ है॥