Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 497

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
अ꣡चि꣢क्रद꣣द्वृ꣢षा꣣ ह꣡रि꣢र्म꣣हा꣢न्मि꣣त्रो꣡ न द꣢꣯र्श꣣तः꣢ । स꣡ꣳ सूर्ये꣢꣯ण दिद्युते ॥४९७॥

अ꣡चि꣢꣯क्रदत् । वृ꣡षा꣢꣯ । ह꣡रिः꣢꣯ । म꣣हा꣢न् । मि꣣त्रः꣢ । मि꣣ । त्रः꣢ । न । द꣣र्शतः꣢ । सम् । सू꣡र्ये꣢꣯ण । दि꣣द्युते ॥४९७॥

Mantra without Swara
अचिक्रदद्वृषा हरिर्महान्मित्रो न दर्शतः । सꣳ सूर्येण दिद्युते ॥

अचिक्रदत् । वृषा । हरिः । महान् । मित्रः । मि । त्रः । न । दर्शतः । सम् । सूर्येण । दिद्युते ॥४९७॥

Samveda - Mantra Number : 497
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(वृषा) दृष्टिकारक वा वीर्यवर्द्धक (हरिः) हरा वा हरणशील (मित्रः न महान्) मित्र के समान सत्कारार्ह (दर्शतः) देखने योग्य सोम (सूर्येण सम) सूर्य के साथ (विद्युते) प्रकाश करता (अचिक्रदत्) और अग्नि में डाला हुआ चिटचिटा शब्द करता है क्योंकि जलयुक्त होता है॥
Footnote
ऋ० ९। २। ६ में भी॥