Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 493

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- निध्रुविः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
अ꣣या꣡ प꣢वस्व꣣ धा꣡र꣢या꣣ य꣢या꣣ सू꣢र्य꣣म꣡रो꣢चयः । हि꣣न्वानो꣡ मानु꣢꣯षीर꣣पः꣢ ॥४९३॥

अ꣣या꣢ । प꣣वस्व । धा꣡र꣢꣯या । य꣡या꣢꣯ । सू꣡र्य꣢꣯म् । अ꣡रो꣢चयः । हि꣣न्वानः꣢ । मा꣡नु꣢꣯षीः । अ꣣पः꣢ ॥४९३॥

Mantra without Swara
अया पवस्व धारया यया सूर्यमरोचयः । हिन्वानो मानुषीरपः ॥

अया । पवस्व । धारया । यया । सूर्यम् । अरोचयः । हिन्वानः । मानुषीः । अपः ॥४९३॥

Samveda - Mantra Number : 493
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
सोम = परमेश्वर ! वा ओषधे ! (मानुषीः अपः) मनुष्यों के कर्मों को (हिन्वानः) प्रेरित करता हुआ तू (यया धारया) जिस तेजोरूप धार वा बहती धार से (सूर्यम्) सूर्य लोक को (अरोचयः) प्रकाशित वा आप्यायित करता है (अया) उसी धार से (पवस्व) प्राप्त हो॥
परमेश्वर वा सोम मनुष्यों को कर्म करने का सामर्थ्य देता और सूर्यलोक को अपने तेज वा घार से प्रकाशित वा आप्यायित करता है॥
Footnote
ऋ० ९। ६३। ७ में भी॥