Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 480

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
वृ꣢षा꣣ ह्य꣡सि꣢ भा꣣नु꣡ना꣢ द्यु꣣म꣡न्तं꣢ त्वा हवामहे । प꣡व꣢मान स्व꣣र्दृ꣡श꣢म् ॥४८०॥

वृ꣡षा꣢꣯ । हि । अ꣡सि꣢꣯ । भा꣣नुना꣢ । द्यु꣣म꣡न्त꣢म् । त्वा꣣ । हवामहे । प꣡व꣢꣯मान । स्व꣣र्दृ꣡श꣢म् । स्वः꣣ । दृ꣡श꣢꣯म् ॥४८०॥

Mantra without Swara
वृषा ह्यसि भानुना द्युमन्तं त्वा हवामहे । पवमान स्वर्दृशम् ॥

वृषा । हि । असि । भानुना । द्युमन्तम् । त्वा । हवामहे । पवमान । स्वर्दृशम् । स्वः । दृशम् ॥४८०॥

Samveda - Mantra Number : 480
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(पवमान) हे पवित्र कारक ! सोम ! वा परमेश्वर ! (भानुना द्युमन्तम्) प्रकाश से दीप्तिमान् (स्वर्दृशम्) सुख दिखाने वाले (त्वा) तुझ को (हवामहे) हम हवन करते, वा पुकारते हैं (हि) निश्चय तू (वृषा) वीर्य वर्धक, वा कामनापूरक (असि) है।
भौतिकपक्ष में भाव यह है कि सोम शुद्धिकारक, प्रकाश वाला, सुखदायक और वीर्यवर्धक है।
Footnote
ऋ० ९। ६५। ४ में (पवमान स्वाध्यः) पाठ है॥