Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 397

1875 Mantra
Devata- आदित्याः Rishi- इरिम्बिठिः काण्वः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
अ꣡पामी꣢꣯वा꣣म꣢प꣣ स्रि꣢ध꣣म꣡प꣢ सेधत दुर्म꣣ति꣢म् । आ꣡दि꣢त्यासो यु꣣यो꣡त꣢ना नो꣣ अ꣡ꣳह꣢सः ॥३९७॥

अ꣡प꣢꣯ । अ꣡मी꣢꣯वाम् । अ꣡प꣢ । स्रि꣡ध꣢꣯म् । अ꣡प꣢꣯ । से꣣धत । दुर्मति꣢म् । दुः꣣ । मति꣢म् । आ꣡दि꣢꣯त्यासः । आ । दि꣣त्यासः । युयो꣡त꣢न । यु꣣यो꣡त꣢ । न꣣ । नः । अँ꣡ह꣢꣯सः ॥३९७॥

Mantra without Swara
अपामीवामप स्रिधमप सेधत दुर्मतिम् । आदित्यासो युयोतना नो अꣳहसः ॥

अप । अमीवाम् । अप । स्रिधम् । अप । सेधत । दुर्मतिम् । दुः । मतिम् । आदित्यासः । आ । दित्यासः । युयोतन । युयोत । न । नः । अँहसः ॥३९७॥

Samveda - Mantra Number : 397
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(आदित्यासः) सूर्य किरणें (अमीवाम्) रोग को (अपसेधत) वर्जती हैं (स्त्रिधम्) बाधक दस्यु चौरादि को (अप) वर्जती हैं (दुर्मतिम्) कामादि विकार से दुष्ट बुद्धि को (अप) वर्जित करती हैं (नः) हमको (अंहसः) पाप से (युयोतन) पृथक् करती हैं॥
अवश्य सूर्य की किरणों से कई रोग दूर होते हैं, चौरादि का भय निवृत्त होता है, रात्रि में स्वाभाविक रीति पर कामादि के विकार उत्पन्न होते हैं उनको भी सूर्य की किरणें हटाती हैं। इसलिये किसी अंश में दुर्मति और पाप से बचाना भौ सम्भव है।
Footnote
ऋ० ८। १५। १० में भी॥