Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 396

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- विश्वमना वैयश्वः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
वे꣢त्था꣣ हि꣡ निरृ꣢꣯तीनां꣣ व꣡ज्र꣢हस्त परि꣣वृ꣡ज꣢म् । अ꣡ह꣢रहः शु꣣न्ध्युः꣡ प꣢रि꣣प꣡दा꣢मिव ॥३९६॥

वे꣡त्थ꣢꣯ । हि꣡ । नि꣡र्ऋ꣢꣯तीनाम् । निः । ऋ꣣तीनाम् । व꣡ज्र꣢꣯हस्त । व꣡ज्र꣢꣯ । ह꣣स्त । परिवृ꣡ज꣢म् । प꣣रि । वृ꣡ज꣢꣯म् । अ꣡ह꣢꣯रहः । अ꣡हः꣢꣯ । अ꣣हः । शुन्ध्युः꣢ । प꣣रिप꣡दा꣢म् । प꣣रि । प꣡दा꣢꣯म् । इ꣣व ॥३९६॥

Mantra without Swara
वेत्था हि निरृतीनां वज्रहस्त परिवृजम् । अहरहः शुन्ध्युः परिपदामिव ॥

वेत्थ । हि । निर्ऋतीनाम् । निः । ऋतीनाम् । वज्रहस्त । वज्र । हस्त । परिवृजम् । परि । वृजम् । अहरहः । अहः । अहः । शुन्ध्युः । परिपदाम् । परि । पदाम् । इव ॥३९६॥

Samveda - Mantra Number : 396
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(वज्रहस्त) हे वज्रतुल्य तीव्र किरण वाले सूर्य ! (शुन्ध्युः) शोधने वाला तू (अहरहः) प्रतिदिन (निर्ऋतीनाम्) अन्धकारों के (परिवृजम्) वर्जन को (वेत्थ हि) अवश्य जानता है। (परिपदामिव) जैसे कि प्रातःकाल चारों ओर जाने वाले पक्षियों को अपने-अपने घोंसलों के वर्जने = छोड़ने को॥
जिस प्रकार सूर्योदय होते ही पक्षिगण अपने घोंसले छोड़ भाग जाते हैं, इसी प्रकार अन्धकार का दूर करना सूर्य भले प्रकार जानता है। अर्थात् अन्य कोई सूर्य्य के समान अन्धकार का वर्जने वाला नहीं है। जो काम जिससे अच्छा बनता है उसी को उसका जानने वाला कहा जाता है, चाहे जड़ हो, चाहे चेतन। निर्ऋति शब्द मृत्यु देवता राक्षस का पर्याय है। वह तामसी अन्धकार कोटि में है। प्रकाश देवकोटि में है। जैसे अमृत मृत्यु को वर्जता है, वैसे ही प्रकाश अन्धकार को।
Footnote
ऋ० ८। २४। २४ में भी॥