Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 395

1875 Mantra
Devata- आदित्याः Rishi- इरिम्बिठिः काण्वः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
तु꣣चे꣡ तुना꣢꣯य꣣ त꣢꣫त्सु नो꣣ द्रा꣡घी꣢य꣣ आ꣡यु꣢र्जी꣣व꣡से꣢ । आ꣡दि꣢त्यासः समहसः कृ꣣णो꣡त꣢न ॥३९५॥

तु꣣चे꣢ । तु꣡ना꣢꣯य । तत् । सु । नः꣣ । द्रा꣡घी꣢꣯यः । आ꣡युः꣢꣯ । जी꣣व꣡से꣢ । आ꣡दि꣢꣯त्यासः । आ । दि꣣त्यासः । समहसः । स । महसः कृणो꣡त꣢न । कृ꣣णो꣡त꣢ । न꣣ ॥३९५॥

Mantra without Swara
तुचे तुनाय तत्सु नो द्राघीय आयुर्जीवसे । आदित्यासः समहसः कृणोतन ॥

तुचे । तुनाय । तत् । सु । नः । द्राघीयः । आयुः । जीवसे । आदित्यासः । आ । दित्यासः । समहसः । स । महसः कृणोतन । कृणोत । न ॥३९५॥

Samveda - Mantra Number : 395
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
हे परमेश्वर ! (सुमहसः) सुप्रकाशित (आदित्यासः) अदितिद्यौ के पुत्र सूर्यादि लोक (नः) हमारे (तुचे) पुत्र और (तनाय) पौत्रादि के लिए (जीवसे) जीवनार्थ (तत्) उस (द्राघीयः) अतिदीर्घ (आयुः) आयु को (कृणोतन) करें॥
अर्थात् आपकी कृपा से सूर्यादि लोकों के प्रकाशादि फल हमारे सन्तानों की आयु के वर्धक हों॥
Footnote
निघण्टु २। २ ऋग्वेद १। ८९। १० इत्यादि के प्रमाण और ऋ० ८। १८। १८ का पाठभेद संस्कृतभाष्य में देखिये॥