Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 392

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
य꣢स्य꣣ त्य꣡च्छम्ब꣢꣯रं꣣ म꣢दे꣣ दि꣡वो꣢दासाय र꣣न्ध꣡य꣢न् । अ꣣य꣡ꣳ स सोम꣢꣯ इन्द्र ते सु꣣तः꣡ पिब꣢꣯ ॥३९२॥

य꣡स्य꣢꣯ । त्यत् । शं꣡ब꣢꣯रम् । शम् । ब꣣रम् । म꣡दे꣢ । दि꣡वो꣢꣯दासाय । दि꣡वः꣢꣯ । दा꣣साय । रन्ध꣡य꣢न् । अ꣣य꣢म् । सः । सो꣡मः꣢ । इ꣣न्द्र । ते । सुतः꣢ । पि꣡ब꣢꣯ ॥३९२॥

Mantra without Swara
यस्य त्यच्छम्बरं मदे दिवोदासाय रन्धयन् । अयꣳ स सोम इन्द्र ते सुतः पिब ॥

यस्य । त्यत् । शंबरम् । शम् । बरम् । मदे । दिवोदासाय । दिवः । दासाय । रन्धयन् । अयम् । सः । सोमः । इन्द्र । ते । सुतः । पिब ॥३९२॥

Samveda - Mantra Number : 392
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) मेघवर्षक ! विद्युत् ! (यस्य) जिस सोम के (मदे) हर्ष में (त्यत् शम्बरम्) उस मेघ को (दिवोदासाय) पृथिवी से निकलने वाले ऊष्मा के लिये (रन्धयन्) गिराता हुआ होता है (सः अयं सोमः) वह यह सोम (ते) तेरे लिये (सुतः) खींचा है (पिब) [इस हवन किये हुए को] पी॥
जब मनुष्य सोमादि ओषधियों को होम करते हैं तब इन्द्र नामक मेघ वर्षाने वाली बिजुली को मद (हर्ष) होता है और वह दिवोदास के लिये मेघ को वर्षाता है। द्युलोक का दास एक प्रकार का ऊष्मा है जो सदा भी पृथिवी से निकलता रहता है और मेघ वर्षने पर विशेष करके। वह घासपात अन्न आदि का उत्पादक है। वही दिवोदास हैं। यह हम पूर्व व्याख्यान कर चुके हैं। बिजुली का भले प्रकार अपना काम करना ही हर्ष जानिये। त्यत् शब्द तत् शब्द का पर्याय है। पुल्लिङ्ग का नपुंसकलिङ्ग व्यत्यय है॥
Footnote
निघण्टु १। १० में शम्बर नाम मेघ और १। १२ में जल और २। ९ में बल का नाम है॥ ऋग्वेद ६। ४३। १ में “रन्धयः” पाठ है॥