Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 390

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- विश्वमना वैयश्वः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
स꣡खा꣢य꣣ आ꣡ शि꣢षामहे꣣ ब्र꣡ह्मेन्द्रा꣢꣯य व꣣ज्रि꣡णे꣢ । स्तु꣣ष꣢ ऊ꣣ षु꣢ वो꣣ नृ꣡त꣢माय धृ꣣ष्ण꣡वे꣢ ॥३९०॥

स꣡खा꣢꣯यः । स । खा꣣यः । आ꣢ । शि꣣षामहे । ब्र꣡ह्म꣢꣯ । इ꣡न्द्रा꣢꣯य । व꣣ज्रि꣡णे꣢ । स्तु꣣षे । उ꣣ । सु꣢ । वः꣣ । नृ꣡त꣢꣯माय । धृ꣣ष्ण꣡वे꣢ ॥३९०॥

Mantra without Swara
सखाय आ शिषामहे ब्रह्मेन्द्राय वज्रिणे । स्तुष ऊ षु वो नृतमाय धृष्णवे ॥

सखायः । स । खायः । आ । शिषामहे । ब्रह्म । इन्द्राय । वज्रिणे । स्तुषे । उ । सु । वः । नृतमाय । धृष्णवे ॥३९०॥

Samveda - Mantra Number : 390
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(सखायः) हे मित्रो ! (वः) तुम्हारे (नृतमाय) अत्यन्त नेता (धृष्णवे) सबको घर्षित कर सके आप धर्षित न हो सके ऐसे (वज्रिणे) पापियों के दण्ड प्रदाता (इन्द्राय) परमेश्वर के लिये (ब्रह्म) वेदोक्त (स्तुषे) स्तोत्रपाठ करो (उ) और हम भी (सु आशिषामहे) भले प्रकार प्रार्थना करते हैं।
Footnote
अष्टाध्यायी ३। १। ८५॥ ६। ३। १३६॥ ८। ३। १०७ इत्यादि प्रमाण और ऋ० ८। २४। १ का पाठभेद संस्कृतभाष्य में देखिये॥