Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 375

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- कृष्ण आङ्गिरसः Chhand- जगती Swara- निषादः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
अ꣡च्छा꣢ व꣣ इ꣡न्द्रं꣢ म꣣त꣡यः꣢ स्व꣣र्यु꣡वः꣢ स꣣ध्री꣢ची꣣र्वि꣡श्वा꣢ उश꣣ती꣡र꣢नूषत । प꣡रि꣢ ष्वजन्त꣣ ज꣡न꣢यो꣣ य꣢था꣣ प꣢तिं꣣ म꣢र्यं꣣ न꣢ शु꣣न्ध्युं꣢ म꣣घ꣡वा꣢नमू꣣त꣡ये꣢ ॥३७५॥

अ꣡च्छ꣢꣯ । वः꣣ । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । म꣣त꣡यः꣢ । स्व꣣र्यु꣡वः꣢ । स꣣ध्री꣡चीः꣢ । स꣣ । ध्री꣡चीः꣢꣯ । वि꣡श्वाः꣢꣯ । उ꣣शतीः꣢ । अ꣣नूषत । प꣡रि꣢꣯ । स्व꣣जन्त । ज꣡न꣢꣯यः । य꣡था꣢꣯ । प꣡ति꣢꣯म् । म꣡र्य꣢꣯म् । न । शु꣣न्ध्यु꣢म् । म꣣घ꣡वा꣢नम् । ऊ꣣त꣡ये꣢ ॥३७५॥

Mantra without Swara
अच्छा व इन्द्रं मतयः स्वर्युवः सध्रीचीर्विश्वा उशतीरनूषत । परि ष्वजन्त जनयो यथा पतिं मर्यं न शुन्ध्युं मघवानमूतये ॥

अच्छ । वः । इन्द्रम् । मतयः । स्वर्युवः । सध्रीचीः । स । ध्रीचीः । विश्वाः । उशतीः । अनूषत । परि । स्वजन्त । जनयः । यथा । पतिम् । मर्यम् । न । शुन्ध्युम् । मघवानम् । ऊतये ॥३७५॥

Samveda - Mantra Number : 375
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
हे मनुष्यो ! (वः) तुम्हारी (स्वर्युवः) परमानन्द चाहने वाली (सध्रीचीः) सीधी सच्ची (उशतीः) कामना करती हुई (विश्वाः मतयः) सारी बुद्धियें (अच्छ) अच्छे प्रकार (इन्द्रम्) परमेश्वर को (अनूषत) स्तुत करें। दृष्टान्त—(न) जैसे (शुन्ध्यम्) शुद्ध (मघवानम्) धनवान् (मर्यम) मनुष्य को (ऊतये) धनधान्य द्वारा अपनी रक्षा के लिये स्तुत करते हैं तद्वत्। दूसरा दृष्टान्त — (यथा) जैसे (जनयः) स्त्रियें (पतिम्) पति को (परिष्वजन्त) आलिङ्गन करती हैं, तद्वत्॥
मनुष्यों का जितना प्रेम स्त्री-पुरुष के परस्परभाव में है, अथवा जितनी कामना और दीनता प्रार्थना धनादि पदार्थों के लिये करते हैं, यदि इतना प्रेम और कामना नम्रता परमेश्वर के प्रति धारण करें तो अवश्य परमानन्द की प्राप्ति और संसार से रक्षा हो॥
Footnote
अष्टाध्यायी ३। २। १७० का प्रमाण और ऋ० १०। ४३। १ में जो भेद है वह संस्कृतभाष्य में देखिये॥