Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 36

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- भर्गः प्रागाथः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
पा꣣हि꣡ नो꣢ अग्न꣣ ए꣡क꣢या पा꣣ह्यू꣡३꣱त꣢ द्वि꣣ती꣡य꣢या । पा꣣हि꣢ गी꣣र्भि꣢स्ति꣣सृ꣡भि꣢रूर्जां पते पा꣣हि꣡ च꣢त꣣सृ꣡भि꣢र्वसो ॥३६॥

पा꣣हि꣢ । नः꣣ । अग्ने । ए꣡क꣢꣯या । पा꣣हि꣢ । उ꣣त꣢ । द्वि꣣ती꣡य꣢या । पा꣣हि꣢ । गी꣣र्भिः꣢ । ति꣣सृ꣡भिः꣢ । ऊ꣣र्जाम् । पते । पाहि꣢ । च꣣तसृ꣡भिः꣢ । व꣣सो ॥३६॥

Mantra without Swara
पाहि नो अग्न एकया पाह्यू३त द्वितीयया । पाहि गीर्भिस्तिसृभिरूर्जां पते पाहि चतसृभिर्वसो ॥

पाहि । नः । अग्ने । एकया । पाहि । उत । द्वितीयया । पाहि । गीर्भिः । तिसृभिः । ऊर्जाम् । पते । पाहि । चतसृभिः । वसो ॥३६॥

Samveda - Mantra Number : 36
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(ऊर्जापते) हे बलपते ! (वसो) हे अन्तर्यामिन् ! (अग्ने) पूजनीयेश्वर ! (एकया) ऋग्वेद के उपदेश से (नः) हमारी (पाहि) रक्षा करो (उत) और (द्वितीयया) यजुर्वेद की वाणी से (पाहि) रक्षा करो। (तिसृभिः, गीर्भिः) ऋग्यजुसामरूप त्रयी की वाणी से (पाहि) रक्षा करो। (चतसृभिः) चारों [वेदों] से (पाहि) रक्षा करो॥
क्योंकि मनुष्यों की रक्षा जिस प्रकार वेदों के उपदेश से हो सकती है उस प्रकार की राजा आदि भी नहीं कर सकते। इसलिये मनुष्यों को सदा परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिये कि वह चारों वेदों के सत्योपदेश से हमारी रक्षा करें॥
भौतिक पक्ष में (ऊर्जापते) रसादि के पालक ! (वसो) ८ वसुओं में एक (अग्ने) अग्ने ! (एकया, नः पाहि) एक [ऋग्वेदस्थवाणी] से हमारी रक्षा कर। (उत, द्वितीयया, पाहि) और दूसरी [यजुर्वेदस्थ वाणी] से, रक्षा कर। (तिसृभिः, गीर्भिः पाहि) तीन [ऋग्यजुः साम की] वाणियों से रक्षा कर। (चतसृभिः पाहि) चारों [वेदोक्त वाणियों से, रक्षा कर॥
अग्नि ही दृष्ट्यादि द्वारा रस का फैलाने वाला, वसुसंज्ञक देव है। वही यजन करने से हमको चार वेदों में लिखे अनुसार फलदायक होता है॥
Footnote
निघं० २। ७ शतपथ ५।१।२८ के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥ ऋग्वेद ८। ४९।९ में भी ऐसा ही पाठ है॥