Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 355

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- प्रगाथः काण्वः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
स꣢ पू꣣र्व्यो꣢ म꣣हो꣡नां꣢ वे꣣नः꣡ क्रतु꣢꣯भिरानजे । य꣢स्य꣣ द्वा꣢रा꣣ म꣡नुः꣢ पि꣣ता꣢ दे꣣वे꣢षु꣣ धि꣡य꣢ आन꣣जे꣢ ॥३५५॥

सः꣢ । पू꣣र्व्यः꣢ । म꣣हो꣡ना꣢म् । वे꣣नः꣢ । क्र꣡तु꣢꣯भिः । आ꣣नजे । य꣡स्य꣢꣯ । द्वा꣡रा꣢꣯ । म꣡नुः꣢꣯ । पि꣣ता꣢ । दे꣣वे꣡षु꣢ । धि꣡यः꣢꣯ । आ꣣नजे꣢ ॥३५५॥

Mantra without Swara
स पूर्व्यो महोनां वेनः क्रतुभिरानजे । यस्य द्वारा मनुः पिता देवेषु धिय आनजे ॥

सः । पूर्व्यः । महोनाम् । वेनः । क्रतुभिः । आनजे । यस्य । द्वारा । मनुः । पिता । देवेषु । धियः । आनजे ॥३५५॥

Samveda - Mantra Number : 355
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
हे विद्वन्निन्द्र (स) वह आप (वेनः) मेधावी (ऋतुभिः) कर्मों से (महोनाम् पूर्व्यः) पूज्यों में अग्रणी (आनजे) पहिचाने जाते हैं। (यस्य) जिन आप के (द्वारा) द्वारा (मनुः) मननशील मनुष्य (धियः) बुद्धियों को (आनजे) उत्पन्न करता है और (देवेषु) विद्वानों में (पिता) पितृतुल्य पूज्य हो जाता है॥
Footnote
निघण्टु ३। ३॥ ३। १५॥ २। १॥ ३। ९ निरुक्त ६। ३३॥ ४। २१ इत्यादि प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥ ऋ० ८। ५२। १ में “महानाम्” और “मनुष्पिता” यह पाठ में अन्तर है॥