Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 346

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- तिरश्चीराङ्गिरसः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
श्रु꣣धी꣡ हवं꣢꣯ तिर꣣श्च्या꣢꣫ इन्द्र꣣ य꣡स्त्वा꣢ सप꣣र्य꣡ति꣢ । सु꣣वी꣡र्य꣢स्य꣣ गो꣡म꣢तो रा꣣य꣡स्पू꣡र्धि म꣣हा꣡ꣳ अ꣢सि ॥३४६॥

श्रु꣣धि꣢ । ह꣡व꣢꣯म् । ति꣣रश्च्याः꣢ । ति꣣रः । च्याः꣢ । इ꣡न्द्र꣢꣯ । यः । त्वा꣣ । सपर्य꣡ति꣢ । सु꣣वीर्य꣢स्य । सु꣣ । वी꣡र्य꣢꣯स्य । गो꣡म꣢꣯तः । रा꣣यः꣢ । पू꣣र्धि । महा꣢न् । अ꣣सि ॥३४६॥

Mantra without Swara
श्रुधी हवं तिरश्च्या इन्द्र यस्त्वा सपर्यति । सुवीर्यस्य गोमतो रायस्पूर्धि महाꣳ असि ॥

श्रुधि । हवम् । तिरश्च्याः । तिरः । च्याः । इन्द्र । यः । त्वा । सपर्यति । सुवीर्यस्य । सु । वीर्यस्य । गोमतः । रायः । पूर्धि । महान् । असि ॥३४६॥

Samveda - Mantra Number : 346
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 12;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) हे परमेश्वर ! वा राजन् ! (महान् असि) आप बड़े हैं अतः (यः) जो पुरुष (त्वा) आप को (सपर्यति) पूजता अर्थात् आप की आज्ञानुसार चलता है उस (सुवीर्यस्य) शुद्धवीर्य ब्रह्मचर्यादि वाले (गोमतः) गौ आदि पशु और पृथिवी आदि के स्वामी की (हवम्) पुकार (तिरश्च्या) अन्तर्धान हुए से (श्रुधि) सुनिये और (रायः) विद्यादि धन (पूर्धि) दीजिये॥
जैसे परमेश्वर अदृश्य रूप से सबकी सुनता और कर्मानुकूल धनादि पदार्थ देता है, इसी प्रकार राजा को चाहिये कि छिप कर सब की पुकार सुने, और क्षेत्रपतियों के धन धान्यादि की वृद्धि होने देवे॥
Footnote
निरुक्त ४। ३ का प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥ ऋ० ८। ९५। ४ में भी॥