Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 330

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
उ꣢दु꣣ ब्र꣡ह्मा꣢ण्यैरत श्रव꣣स्ये꣡न्द्र꣢ꣳ सम꣣र्ये꣡ म꣢हया वसिष्ठ । आ꣡ यो विश्वा꣢꣯नि꣣ श्र꣡व꣢सा त꣣ता꣡नो꣢पश्रो꣣ता꣢ म꣣ ई꣡व꣢तो꣣ व꣡चा꣢ꣳसि ॥३३०॥

उ꣢त् । उ꣣ । ब्र꣡ह्मा꣢꣯णि । ऐ꣣रत । श्रवस्य꣢ । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । स꣣मर्ये꣢ । स꣣ । मर्ये꣢ । म꣣हय । वसिष्ठ । आ꣢ । यः । वि꣡श्वा꣢꣯नि । श्र꣡व꣢꣯सा । त꣣ता꣡न꣢ । उ꣣पश्रोता꣢ । उ꣣प । श्रोता꣢ । मे꣣ । ई꣡व꣢꣯तः । व꣡चां꣢꣯ऽसि ॥३३०॥

Mantra without Swara
उदु ब्रह्माण्यैरत श्रवस्येन्द्रꣳ समर्ये महया वसिष्ठ । आ यो विश्वानि श्रवसा ततानोपश्रोता म ईवतो वचाꣳसि ॥

उत् । उ । ब्रह्माणि । ऐरत । श्रवस्य । इन्द्रम् । समर्ये । स । मर्ये । महय । वसिष्ठ । आ । यः । विश्वानि । श्रवसा । ततान । उपश्रोता । उप । श्रोता । मे । ईवतः । वचांऽसि ॥३३०॥

Samveda - Mantra Number : 330
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 10;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(वसिष्ठ) हे अतिश्रेष्ठ मनुष्य ! तू (मे) मुझ (ईवतः) व्यापक परमेश्वर के (ब्रह्माणि) वेदोक्त (श्रवस्या) धन धान्यादि के लिये हितकारी (वचांसि) वचनों को (आ-उप-श्रोत) श्रद्धा से सुन (उ) तथा (यः) जो (श्रवसा) धन धान्यादि से (विश्वानि) सब जगतों को (ततान) विस्तृत करता है उस (इन्द्रम्) राजा को (समर्ये) संग्राम निमित्त (उत् ऐरत) उच्च प्रभावशाली कर (महय) और सत्कृत कर॥
Footnote
निघण्टु २। ७॥ २।९॥ २। १७॥ २। १८ के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥ ऋ० ७। २३। १ में “शवसा” यह पाठ है॥