Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 32

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
क꣣वि꣢म꣣ग्नि꣡मुप꣢꣯ स्तुहि स꣣त्य꣡ध꣢र्माणमध्व꣣रे꣢ । दे꣣व꣡म꣢मीव꣣चा꣡त꣢नम् ॥३२॥

क꣣वि꣢म् । अ꣣ग्नि꣢म् । उ꣡प꣢꣯ । स्तु꣣हि । स꣣त्य꣡ध꣢र्माणम् । स꣣त्य꣢ । ध꣣र्माणम् । अध्वरे꣢ । दे꣣व꣢म् । अ꣣मीवचा꣡त꣢नम् । अ꣣मीव । चा꣡त꣢꣯नम् ॥३२॥

Mantra without Swara
कविमग्निमुप स्तुहि सत्यधर्माणमध्वरे । देवममीवचातनम् ॥

कविम् । अग्निम् । उप । स्तुहि । सत्यधर्माणम् । सत्य । धर्माणम् । अध्वरे । देवम् । अमीवचातनम् । अमीव । चातनम् ॥३२॥

Samveda - Mantra Number : 32
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(कविम्) सर्वज्ञ (सत्यधर्माणम्) सत्यधर्मी (देवम्) प्रकाशक (अमीवचातनम्) रोगबिनाशक (अग्निम्) तेजस्वी परमात्मा की (अध्वरे) ब्रह्मयज्ञादि में (उप-स्तुहि) उपासना और स्तुति कर।
भौतिक पक्ष में— (कविम्) जगाने वाले (सत्यधर्माणम्) नियम से न डिगने वाले (देवम्) प्रकाशयुक्त (अमीवचातनम्) रोगनिवारक (अग्निम्) सूर्य्याग्नि का (अध्वरे) विज्ञानकाण्ड में (उप-स्तुहि) वर्णन कर।
मनुष्य को विहित है कि वह विज्ञान (साइंस) के प्रसंग में सूर्य की स्तुति करे कि सूर्य जगाने वाला है क्योंकि उसके उदय से अन्धियारा मिटता, चान्दना होता, निद्रा और तमोगुण निवृत्त होता है, जिससे यह कहा जाता है कि बुद्धि का प्रेरक होने से कवि अर्थात् मेधावी है। वह सत्यधर्मा है, क्योंकि उसके उदय अस्त नियमबद्ध होते हैं। वह प्रकाशक होने से देव है। उसके प्रकाश के साथ गरमी फैलती है, गरमी से वायु बहता है, वायु बहने से सड़न निवृत्त होती है और सड़न रोगों की उत्पादक है, बस सड़न का निवारक होने से सूर्य रोगनिवारक है॥
Footnote
ऐसा ही पाठ ऋग्वेद १। १२। ७ में आया है॥