Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 318

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
इ꣢न्द्रं꣣ न꣡रो꣢ ने꣣म꣡धि꣢ता हवन्ते꣣ य꣡त्पार्या꣢꣯ यु꣣न꣡ज꣢ते꣣ धि꣢य꣣स्ताः꣢ । शू꣢रो꣣ नृ꣡षा꣢ता꣣ श्र꣡व꣢सश्च꣣ का꣢म꣣ आ꣡ गोम꣢꣯ति व्र꣣जे꣡ भ꣢जा꣣ त्वं꣡ नः꣢ ॥३१८॥

इ꣡न्द्र꣢꣯म् । न꣡रः꣢꣯ । ने꣣म꣡धि꣢ता । ने꣣म꣢ । धि꣣ता । हवन्ते । य꣢त् । पा꣡र्याः꣢ । यु꣣न꣡ज꣢ते । धि꣡यः꣢꣯ । ताः । शू꣡रः꣢꣯ । नृ꣡षा꣢꣯ता । नृ । सा꣣ता । श्र꣡व꣢꣯सः । च । ꣣ का꣡मे꣢꣯ । आ । गो꣡म꣢꣯ति । व्र꣣जे꣢ । भ꣣ज । त्व꣢म् । नः꣣ ॥३१८॥

Mantra without Swara
इन्द्रं नरो नेमधिता हवन्ते यत्पार्या युनजते धियस्ताः । शूरो नृषाता श्रवसश्च काम आ गोमति व्रजे भजा त्वं नः ॥

इन्द्रम् । नरः । नेमधिता । नेम । धिता । हवन्ते । यत् । पार्याः । युनजते । धियः । ताः । शूरः । नृषाता । नृ । साता । श्रवसः । च । कामे । आ । गोमति । व्रजे । भज । त्वम् । नः ॥३१८॥

Samveda - Mantra Number : 318
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 9;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(यत्) जब (नरः) मनुष्य (नेमधिता) संग्राम में (इन्द्रम्) राजा का (हवन्ते) आश्रय करते हैं तब (ताः) उन प्रसिद्ध (पार्याः) पार लगाने वाले (धियः) कामों को (युनजते) ठीक-ठीक करते हैं। वह इन्द्र (शूरः) वीर (नृषाता) मनुष्यों को यथास्थान विभागपूर्वक खड़ा करने वाला है। वैसे हे राजन् ! (त्वम्) तू (नः) हम को (अवसः) यश के (चकामे) चाहने वाले (गोमति) गवादिपशुयुक्त (व्रजे) खरक निमित्त (आ भज) सत्कारपूर्वक रख॥
साधारण योद्धा लोग संग्रामों में राजा के आश्रय रहते हैं। उसी की आज्ञानुसार युद्ध-कौशल दिखाते हैं। वह उनका नायक और यथास्थान विभागपूर्वक खड़ा करने वाला है। उसको यश की इच्छा करते हुए उचित है कि गवादिपशुयुक्त प्रजावर्ग के सुखार्थ अपने वीर योद्धों को सत्कारपूर्वक रक्खे॥
Footnote
निघण्टु २। १७॥ २। १ अष्टाध्यायी ७। १। ३९ के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥ ऋ० ७। २७। १ में “चकान” ऐसा पाठ है॥