Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 294

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
इ꣣म꣡ इ꣡न्द्र꣣ म꣡दा꣢य ते꣣ सो꣡मा꣢श्चिकित्र उ꣣क्थि꣢नः꣣ । म꣡धोः꣢ पपा꣣न꣡ उप꣢꣯ नो꣣ गि꣡रः꣢ शृणु꣣ रा꣡स्व꣢ स्तो꣣त्रा꣡य꣢ गिर्वणः ॥२९४

इ꣣मे꣢ । इ꣣न्द्र । म꣡दा꣢꣯य । ते꣣ । सो꣡माः꣢꣯ । चि꣣कित्रे । उक्थि꣡नः꣢ । म꣡धोः꣢꣯ । प꣣पानः꣢ । उ꣡प꣢꣯ । नः꣣ । गि꣡रः꣢꣯ । शृ꣣णु । रा꣡स्व꣢꣯ । स्तो꣣त्रा꣡य꣢ । गि꣣र्वणः । गिः । वनः ॥२९४॥

Mantra without Swara
इम इन्द्र मदाय ते सोमाश्चिकित्र उक्थिनः । मधोः पपान उप नो गिरः शृणु रास्व स्तोत्राय गिर्वणः ॥२९४

इमे । इन्द्र । मदाय । ते । सोमाः । चिकित्रे । उक्थिनः । मधोः । पपानः । उप । नः । गिरः । शृणु । रास्व । स्तोत्राय । गिर्वणः । गिः । वनः ॥२९४॥

Samveda - Mantra Number : 294
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 7;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(गिर्वणः) हे वाणी से संभजनीय ! (इन्द्र) परमेश्वर ! (मधोः) मधुरभाषी (उक्थिनः) स्तुतिकर्ता के (इमे) ये (सोमाः) सोमादिक (मदाय) [पूर्व मन्त्रोक्त इन्द्र और उसके उपलक्षण से ग्रहरण किये अन्य देवताओं के] हर्षार्थ (चिकित्रे) रोग दूर करते हैं। (ते) आपके (स्तोत्राय) स्तोत्र के लिये (नः) हमारी (गिरः) वाणियों को (उप-शृणु) स्वीकृत कीजिये (पपानः) रक्षा करते हुए आप (रास्व) [अभीष्ट पदार्थ] दीजिये॥
Footnote
निघण्ट ३। २० इत्यादि के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥