Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 291

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथि0मेध्यातिथी काण्वौ Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
म꣣हे꣢ च꣣ न꣢ त्वा꣢द्रिवः꣣ प꣡रा꣢ शु꣣ल्का꣡य꣢ दीयसे । न꣢ स꣣ह꣡स्रा꣢य꣣ ना꣡युता꣢꣯य वज्रिवो꣣ न꣢ श꣣ता꣡य꣢ शतामघ ॥२९१॥

म꣣हे꣢ । च꣣ । न꣢ । त्वा꣣ । अद्रिवः । अ । द्रिवः । प꣡रा꣢꣯ । शु꣣ल्का꣡य꣢ । दी꣣यसे । न꣢ । स꣣ह꣡स्रा꣢य । न । अ꣣यु꣡ता꣢य । अ꣣ । यु꣡ता꣢꣯य । व꣣ज्रिवः । न꣢ । श꣣ता꣡य꣢ । श꣣तामघ । शत । मघ ॥२९१॥

Mantra without Swara
महे च न त्वाद्रिवः परा शुल्काय दीयसे । न सहस्राय नायुताय वज्रिवो न शताय शतामघ ॥

महे । च । न । त्वा । अद्रिवः । अ । द्रिवः । परा । शुल्काय । दीयसे । न । सहस्राय । न । अयुताय । अ । युताय । वज्रिवः । न । शताय । शतामघ । शत । मघ ॥२९१॥

Samveda - Mantra Number : 291
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 6;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(अद्रिवः) हे मेघों के धारक ! (वज्रिवः) दुष्टों के ताडनकर्त्ता ! (शतामघ) बहुत धन वाले ! इन्द्र ! परमेश्वर ! (त्वा) आप [हम से] (महे) बड़े (शुल्काय) मूल्य के लिये (च) भी (न) नहीं (परा दीयसे) त्यागे जाते हैं। (न सहस्त्राय) न सहस्र के लिये (न अयुताय) न १० सहस्र के लिये (न शताय) और न इससे भी बहुत के लिये॥
अर्थात् मनुष्यों को चाहिये कि सहस्रों के धन के लिये भी कभी परमेश्वर धन जाए को न हारें। किन्तु सहस्रादि अनन्त धन जाए सो जाए परन्तु परमेश्वर की आज्ञा के विपरीत कुछ न करें।
Footnote
निघण्टु १। १०॥ ३। १॥ २। १० इत्यादि के प्रमाण और ऋ० ८। १। ५ का अन्तर संस्कृतभाष्य में देखिये॥