Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 288

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
य꣣दा꣢ क꣣दा꣡ च꣢ मी꣣ढु꣡षे꣢ स्तो꣣ता꣡ ज꣢रेत꣣ म꣡र्त्यः꣢ । आ꣡दिद्व꣢꣯न्देत꣣ व꣡रु꣢णं वि꣣पा꣢ गि꣣रा꣢ ध꣣र्त्ता꣢रं꣣ वि꣡व्र꣢तानाम् ॥२८८

य꣣दा꣢ । क꣣दा꣢ । च꣣ । मीढु꣡षे꣢ । स्तो꣣ता । ज꣣रेत । म꣡र्त्यः꣢꣯ । आत् । इत् । व꣣न्देत । व꣡रु꣢꣯णम् । वि꣣पा꣢ । गि꣣रा꣢ । ध꣣र्त्ता꣡र꣢म् । वि꣡व्र꣢꣯तानाम् । वि । व्र꣣तानाम् ॥२८८॥

Mantra without Swara
यदा कदा च मीढुषे स्तोता जरेत मर्त्यः । आदिद्वन्देत वरुणं विपा गिरा धर्त्तारं विव्रतानाम् ॥२८८

यदा । कदा । च । मीढुषे । स्तोता । जरेत । मर्त्यः । आत् । इत् । वन्देत । वरुणम् । विपा । गिरा । धर्त्तारम् । विव्रतानाम् । वि । व्रतानाम् ॥२८८॥

Samveda - Mantra Number : 288
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 6;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
परमात्मा की स्तुति के साथ वन्दना भी आवश्यक है। इसका विधिवाक्य कहते हैं कि—(स्तोता) स्तुति करने वाला (मर्त्यः) मनुष्य (मीढुषे) धर्मार्थ काम मोक्ष के वर्षक परमेश्वर के लिये (यदाकदा च) जब कभी (जरेत) स्तुति करे (आत् इत्) तब ही (विव्रतानाम्) विविध कर्मों के (धर्तारम्) धर्ता (वरुणम्) वरण करने योग्य परमात्मा को (गिरा) जो बोलती है उस (विपा) वाणी से (वन्देत) वन्दना भी करे। अर्थात् वन्दनारहित स्तुति न करे किन्तु वन्दना और स्तुति दोनों करे।
Footnote
निघण्टु ३। १४॥ १। ११॥ २। १ इत्यादि के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥