Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 285

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
सु꣣नो꣡त꣢ सोम꣣पा꣢व्ने꣣ सो꣢म꣣मि꣡न्द्रा꣢य व꣣ज्रि꣡णे꣢ । प꣡च꣢ता प꣣क्ती꣡रव꣢꣯से कृणु꣣ध्व꣢꣯मित्पृ꣣ण꣢न्नित्पृ꣢꣯ण꣣ते꣡ मयः꣢꣯ ॥२८५॥

सु꣣नो꣡त꣢ । सो꣣मपा꣡व्ने꣢ । सो꣣म । पा꣡व्ने꣢꣯ । सो꣡म꣢꣯म् । इ꣡न्द्रा꣢꣯य । व꣣ज्रि꣡णे꣢ । प꣡च꣢꣯त । प꣣क्तीः꣢ । अ꣡व꣢꣯से । कृ꣣णुध्व꣢म् । इत् । पृ꣣ण꣢न् । इत् । पृ꣣णते꣢ । म꣡यः꣢꣯ ॥२८५॥

Mantra without Swara
सुनोत सोमपाव्ने सोममिन्द्राय वज्रिणे । पचता पक्तीरवसे कृणुध्वमित्पृणन्नित्पृणते मयः ॥

सुनोत । सोमपाव्ने । सोम । पाव्ने । सोमम् । इन्द्राय । वज्रिणे । पचत । पक्तीः । अवसे । कृणुध्वम् । इत् । पृणन् । इत् । पृणते । मयः ॥२८५॥

Samveda - Mantra Number : 285
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 6;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
रक्षा और सुख के लिये प्रार्थना किया हुआ परमेश्वर, यह जान कर कि मनुष्यों का समस्त सुख और रक्षा, शुद्ध वायु जल वृष्टि और ओषधि आदि पर निर्भर है, उपदेश करता है कि हे मनुष्यो ! तुम (सोमपाव्ने) सोम पीने वाले (वज्रिणे) कड़क रूप वज्र के धर्त्ता (इन्द्राय) अन्तरिक्षस्थान देवविशेष के लिये (सोमम्) सोमादि ओषधियों का (सुनोत) अभिषव करो—सम्पादन करो। (अवसे) रक्षा के निमित्त (पक्तीः) पकाने योग्य पुरोडाशादि (पचत) पकाओ। (इत्) ऐसे सब काम (कृष्णुध्वम्) करो (इत्) ही (पृणत्) देने वाला (मयः) सुख (पुणते) देता है॥
Footnote
निघण्टु ३। २०॥ ३। ६ के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥ ऋग्वेद ७। ३२। ८ में “सुनोता” ऐसा दीर्घान्त पाठ है॥