Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 277

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- देवातिथिः काण्वः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
अ꣣श्वी꣢ र꣣थी꣡ सु꣢रू꣣प꣢꣫ इद्गोमा꣣ꣳ य꣡दि꣢न्द्र ते꣣ स꣡खा꣢ । श्वा꣣त्रभा꣢जा꣣ व꣡य꣢सा सचते꣣ स꣡दा꣢ च꣣न्द्रै꣡र्या꣣ति स꣣भा꣡मु꣢꣯प ॥२७७॥

अ꣣श्वी꣢ । र꣣थी꣢ । सु꣣रूपः꣢ । सु꣣ । रूपः꣢ । इत् । गो꣡मा꣢꣯न् । यत् । इ꣣न्द्र । ते । स꣡खा꣢꣯ । स । खा꣣ । श्वात्रभा꣡जा꣢ । श्वा꣣त्र । भा꣡जा꣢꣯ । व꣡य꣢꣯सा । स꣣चते । स꣡दा꣢꣯ । च꣣न्द्रैः꣢ । या꣣ति । सभा꣢म् । स꣣ । भा꣢म् । उ꣡प꣢꣯ ॥२७७॥

Mantra without Swara
अश्वी रथी सुरूप इद्गोमाꣳ यदिन्द्र ते सखा । श्वात्रभाजा वयसा सचते सदा चन्द्रैर्याति सभामुप ॥

अश्वी । रथी । सुरूपः । सु । रूपः । इत् । गोमान् । यत् । इन्द्र । ते । सखा । स । खा । श्वात्रभाजा । श्वात्र । भाजा । वयसा । सचते । सदा । चन्द्रैः । याति । सभाम् । स । भाम् । उप ॥२७७॥

Samveda - Mantra Number : 277
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) हे परमेश्वर ! वा राजन् ! (यत्) जब [मनुष्य] (ते) आप के (सखा) अनुकूल होता है (इत्) तभी (अश्वी) अश्वों वाला (रथी) रथों वाला (गोमान्) गौओं वाला और (सुरूपः) सुन्दर स्वरूप वाला होता है। तथा (श्वात्रभाजा) धन सहित (वयसा) अन्न से (सचते) संगति करता है। और (सदा) सर्वदा (चन्द्रः) आह्लादकारक सहचरों के साथ (सभाम्) सभा को (उप-याति) प्राप्त होता है॥
न्यायकारी राजा और परमेश्वर के कृपाभाजन पुरुष ही रथ, गौ, धन, धान्य से सुखी और सभा के रत्न बनते हैं॥
सूर्यपक्ष में (इन्द्र) हे राजन् ! (ते) आपका (सखा) समानख्याति सूर्य (यत्) जिस कारण (अश्वी) शीघ्र गमन की हेतु उष्णता वाला (पथी) रमणीय स्वरूप वाला (सुरूपः) भले प्रकार रूप का संचारक है (इत्) इस कारण (श्वात्रभाजा) धनभागी (वयसा) धान्य से (सचते) संगति करता और (सदा) सर्वदा (चन्द्रैः) अनेक चन्द्रमाओं के सहित (सभाम्) गगनमण्डल रूप सभा में (उप-याति) प्राप्त रहता हैं।
Footnote
इससे चन्द्रमाओं का दो से अधिक होना भी पाया जाता है। निघण्टु २। ७॥ २। १० निरुक्त ११। ५ के प्रमाण और ऋ० ८। ४। ९ का पाठभेद संस्कृतभाष्य में देखिये॥