Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 276

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- जमदग्निर्भार्गवः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
ब꣢ण्म꣣हा꣡ꣳ अ꣢सि सू꣣र्य ब꣡डा꣢दित्य म꣣हा꣡ꣳ अ꣢सि । म꣣ह꣡स्ते꣢ स꣣तो꣡ म꣢हि꣣मा꣡ प꣢निष्टम म꣣ह्ना꣡ दे꣢व म꣣हा꣡ꣳ अ꣢सि ॥२७६॥

ब꣢ट् । म꣣हा꣢न् । अ꣢सि । सूर्य । ब꣢ट् । आ꣣दित्य । आ । दित्य । महा꣢न् । अ꣣सि । महः꣢ । ते꣣ । सतः꣢ । म꣢हिमा꣢ । प꣣निष्टम । मह्ना꣢ । दे꣣व । महा꣢न् । अ꣣सि ॥२७६॥

Mantra without Swara
बण्महाꣳ असि सूर्य बडादित्य महाꣳ असि । महस्ते सतो महिमा पनिष्टम मह्ना देव महाꣳ असि ॥

बट् । महान् । असि । सूर्य । बट् । आदित्य । आ । दित्य । महान् । असि । महः । ते । सतः । महिमा । पनिष्टम । मह्ना । देव । महान् । असि ॥२७६॥

Samveda - Mantra Number : 276
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
सूर्य के दृष्टान्त से राजा की प्रशंसा है कि—(सूर्य) कामों में प्रेरणा करने वाले ! (बट्) ठीक (महान्) तू बड़ा (असि) है। (आदित्य) रसों के खींचने वाले ! (बट्) सत्य तू (महाँ असि) महान् है (ते) तुझ (सतः) उत्तम की (महिमा) बड़ाई (महः) बड़ी है। (पनिष्टम) प्रशंसा के योग्य ! (देव) दिव्यगुण ! (महा) बड़प्पन से (महां असि) तू महान् है।
अर्थात् जैसे सूर्य और परमेश्वर प्रजा को चेताते हैं, रसों का आकर्षणादि करते हैं, प्रशंसनीय, दिव्य गुणों से युक्त हैं, और परमेश्वर सर्व की अपेक्षा से तथा सूर्य अन्य लोकों की अपेक्षा से बड़ा है। वैसे ही राजा भी व्यापारादि में प्रजा का प्रवर्तक, कर ग्रहण करने वाला, प्रशंसनीय, दिव्य गुणयुक्त और साधारण मनुष्यों की अपेक्षा महान् होवे॥
Footnote
ऋ० ८। १०१। ११ में “महस्ते सतो महिमा पनस्यतेऽद्धा देव महां असि” यह पाठ है॥