Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 275

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- इरिम्बिठिः काण्वः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
वा꣡स्तो꣢ष्पते ध्रु꣣वा꣡ स्थूणाꣳ स꣢꣯त्रꣳ सो꣣म्या꣡ना꣢म् । द्र꣣प्सः꣢ पु꣣रां꣢ भे꣢त्ता꣡ शश्व꣢꣯तीना꣣मि꣢न्द्रो꣣ मु꣡नी꣢ना꣣ꣳ स꣡खा꣢ ॥२७५॥

वा꣡स्तोः꣢꣯ । प꣣ते । ध्रुवा꣢ । स्थू꣡णा꣢꣯ । अँ꣡सत्रम् । सो꣣म्या꣡ना꣢म् । द्र꣣प्सः꣢ । पु꣣रा꣢म् । भे꣣त्ता꣢ । श꣡श्व꣢꣯तीनाम् । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । मु꣡नी꣢꣯नाम् । स꣡खा꣢꣯ । स । खा꣣ ॥२७५॥

Mantra without Swara
वास्तोष्पते ध्रुवा स्थूणाꣳ सत्रꣳ सोम्यानाम् । द्रप्सः पुरां भेत्ता शश्वतीनामिन्द्रो मुनीनाꣳ सखा ॥

वास्तोः । पते । ध्रुवा । स्थूणा । अँसत्रम् । सोम्यानाम् । द्रप्सः । पुराम् । भेत्ता । शश्वतीनाम् । इन्द्रः । मुनीनाम् । सखा । स । खा ॥२७५॥

Samveda - Mantra Number : 275
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(वास्तोष्पते) हे गृहों के पालक ! राजन् ! वा परमेश्वर आप (सोम्यानाम्) सौम्य स्वभाव प्रजाजनों के (ध्रुवा) अचल (स्थूणा) गृहस्तम्भ के तुल्य आधार हैं (अंसत्रम्) कवच के तुल्य रक्षक हैं (द्रप्सः) शीघ्र गति वाले वा ज्ञानी हैं (शश्वतीनाम्) बहुत (पुराम्) शत्रुदुर्गों वा देह बन्धनों के (नेता) नाशक हैं (इन्द्रः) परमैश्वर्यवान् और (मुनीनाम्) मुनियों के (सखा) मित्र हैं।
Footnote
निघण्टु ३। १ और ऋग्वेद ८। १७। १४ का पाठभेद संस्कृतभाष्य में देखिये॥