Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 272

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- कलिः प्रागाथः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
व꣣य꣡मे꣢नमि꣣दा꣡ ह्योपी꣢꣯पेमे꣣ह꣢ व꣣ज्रि꣡ण꣢म् । त꣡स्मा꣢ उ अ꣣द्य꣡ सव꣢꣯ने सु꣣तं꣡ भ꣣रा꣢ नू꣣नं꣡ भू꣢षत श्रु꣣ते꣢ ॥२७२॥

व꣣य꣢म् । ए꣣नम् । इदा꣢ । ह्यः । अ꣡पी꣢꣯पेम । इ꣣ह꣢ । व꣣ज्रि꣡ण꣢म् । त꣡स्मै꣢꣯ । उ꣣ । अद्य꣢ । अ꣣ । द्य꣢ । स꣡व꣢꣯ने । सु꣣त꣢म् । भ꣣र । आ꣢ । नू꣣न꣢म् । भू꣣षत । श्रुते꣢ ॥२७२॥

Mantra without Swara
वयमेनमिदा ह्योपीपेमेह वज्रिणम् । तस्मा उ अद्य सवने सुतं भरा नूनं भूषत श्रुते ॥

वयम् । एनम् । इदा । ह्यः । अपीपेम । इह । वज्रिणम् । तस्मै । उ । अद्य । अ । द्य । सवने । सुतम् । भर । आ । नूनम् । भूषत । श्रुते ॥२७२॥

Samveda - Mantra Number : 272
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
हे मित्रो ! (वयम्) हम ब्रह्मज्ञानी लोग (एनम्) इन (वज्रिणम्) दुष्टों पर दण्डधारी परमेश्वर को (इत्) ही (ह्यः) भूतकाल में (आ अपीपेम) सर्वतोभाव से प्रसन्न करते रहे हैं। और (नूनम्) निश्चय [आप लोग भी] (अद्य) अब (श्रुते) विख्यात (सवने) यज्ञ में (सुतम्) स्तुति करने वाला (भर) भरण कीजिये (उ) और (तस्मै) उस परमेश्वर के लिये (भूषत) [हृदय को रागद्वेषादि मल दूर करके] सुन्दर भूषित करो॥
अर्थात् ज्ञानियों की यह परम्परा है कि सर्व काल में यज्ञादि उत्तम अवसरों पर विशेषकर अपने स्वामी परमात्मा की प्रीति के लिए अपने हृदय से पापादि कुसंस्कारों को दूर करके भूषित करते हैं॥
Footnote
निघण्टु ३। १७॥ ३। १६ के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥
ऋ० ८। ५५। ७ में “समना सुतम्” पाठ है।