Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 269

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- नृमेधपुरुमेधावाङ्गिरसौ Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
आ꣢ नो꣣ वि꣡श्वा꣢सु꣣ ह꣢व्य꣣मि꣡न्द्र꣢ꣳ स꣣म꣡त्सु꣢ भूषत । उ꣢प꣣ ब्र꣡ह्मा꣢णि꣣ स꣡व꣢नानि वृत्रहन्परम꣣ज्या꣡ ऋ꣢चीषम ॥२६९॥

आ꣢ । नः꣣ । वि꣡श्वा꣢꣯सु । ह꣡व्य꣢꣯म् । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । स꣣म꣡त्सु꣢ । स꣣ । म꣡त्सु꣢꣯ । भू꣣षत । उ꣡प꣢꣯ । ब्र꣡ह्मा꣢꣯णि । स꣡व꣢꣯नानि । वृ꣣त्रहन् । वृत्र । हन् । परमज्याः꣢ । प꣣रम । ज्याः꣢ । ऋ꣣चीषम ॥२६९॥

Mantra without Swara
आ नो विश्वासु हव्यमिन्द्रꣳ समत्सु भूषत । उप ब्रह्माणि सवनानि वृत्रहन्परमज्या ऋचीषम ॥

आ । नः । विश्वासु । हव्यम् । इन्द्रम् । समत्सु । स । मत्सु । भूषत । उप । ब्रह्माणि । सवनानि । वृत्रहन् । वृत्र । हन् । परमज्याः । परम । ज्याः । ऋचीषम ॥२६९॥

Samveda - Mantra Number : 269
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(ऋचीषम) हे स्तुत्य ! (परमज्याः) उद्भट शत्रुओं का दमन करने वाले (वृत्रहन्) रुकावटों को मार भगाने वाले ! परमेश्वर ! (विश्वासु) समस्त (समत्सु) युद्धादि बाधाओं में (नः) हमारे (ब्रह्माणि) वेदोक्त स्तोत्र औौर (सवनानि) प्रातः सवनादि तीनों सवन (हव्यम्) पुकारने योग्य (इन्द्रम्) आप परमेश्वर को (आ उप भूषत) रक्षार्थ सुशोभित करो॥
अर्थात् हे जगदीश ! हमारी समस्त बाधाओं में सहायतार्थ हमारे स्तोत्र और यज्ञ हमें आपको प्राप्त करावें।
Footnote
निघण्टु २। १७ निरुक्त ६। २३ के प्रमाण और ऋग्वेद ८। ९०। १ का पाठान्तर संस्कृतभाष्य में में देखिये॥