Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 268

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- पुरुहन्मा आङ्गिरसः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
न꣢ सी꣣म꣡दे꣢व आप꣣ त꣡दिषं꣢꣯ दीर्घायो꣣ म꣡र्त्यः꣢ । ए꣡त꣢ग्वा꣣ चि꣣द्य꣡ एत꣢꣯शो यु꣣यो꣡ज꣢त꣣ इ꣢न्द्रो꣣ ह꣡री꣢ यु꣣यो꣡ज꣢ते ॥२६८॥

न꣢ । सीम् । अ꣡दे꣢꣯वः । अ । दे꣣वः । आप । तत् । इ꣡ष꣢꣯म् । दी꣣र्घायो । दीर्घ । आयो । म꣡र्त्यः꣢꣯ । ए꣡त꣢꣯ग्वा । ए꣡त꣢꣯ । ग्वा꣣ । चित् । यः꣢ । ए꣡त꣢꣯शः । यु꣣यो꣡ज꣢ते । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । हरीइ꣡ति꣢ । यु꣣यो꣡ज꣢ते ॥२६८॥

Mantra without Swara
न सीमदेव आप तदिषं दीर्घायो मर्त्यः । एतग्वा चिद्य एतशो युयोजत इन्द्रो हरी युयोजते ॥

न । सीम् । अदेवः । अ । देवः । आप । तत् । इषम् । दीर्घायो । दीर्घ । आयो । मर्त्यः । एतग्वा । एत । ग्वा । चित् । यः । एतशः । युयोजते । इन्द्रः । हरीइति । युयोजते ॥२६८॥

Samveda - Mantra Number : 268
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(दीर्घायो) हे नित्य ! जीवात्मन् ! (अदेवः) बिना ईश्वर के मनुष्य (इषम्) शारीरिक और आत्मिक भोजन (न सीम्) नहीं ही (आपतत्) पा सकता (चित्) क्योंकि (यः) जो (एतग्वा) घोड़े वाला है [वही](एतशः) घोड़े को (युयोजते) जोतता है। और (इन्द्रः) सूर्य ही (हरी) किरणों को (युयोजते) संयुक्त करता है॥
परमात्मा ही के समस्त पदार्थ हैं इस लिए वही सबको यथाभाग देता है वह न हो तो कोई मनुष्य संचित कर्मों का फल न पा सके। क्योंकि स्वतन्त्रता से कोई पुरुष किसी पदार्थ का स्वामी नहीं है। फिर स्वतन्त्रता से किसी पदार्थ का भोग किसी को कैसे मिल सकता है? रथ के स्वामी ही के घोड़े जुतते हैं, स्वामी के बिना स्वतन्त्र घोड़े नहीं जुत सकते, और न सूर्य के बिना स्वतन्त्र किसी पदार्थ में किरणें जुड़ सकती हैं। जैसे दरिद्र पुरुष अपने घोड़े ही नहीं रखता फिर जोते किसे ? और जैसे बिना प्रकाश के घटादि पदार्थ प्रकाश की पूंजी ही नहीं रखते फिर चमकें कैसे ? ऐसे ही यह जगत् किसी पदार्थ पर स्वत्व ही नहीं रखता तब भोग कहां से कर सके ? अतः परमात्मा ही भोग का प्रदाता है॥
Footnote
निघण्टु १। १४॥ १। १५ के प्रमाण और ऋ० ८। ७०। ७ का पाठभेद संस्कृतभाष्य में देखिये॥