Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 263

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
स꣣त्य꣢मि꣣त्था꣡ वृषे꣢꣯दसि꣣ वृ꣡ष꣢जूतिर्नोऽवि꣣ता꣢ । वृ꣢षा꣣꣬ ह्यु꣢꣯ग्र शृण्वि꣣षे꣡ प꣢रा꣣व꣢ति꣣ वृ꣡षो꣢ अर्वा꣣व꣡ति꣢ श्रु꣣तः꣢ ॥२६३॥

स꣣त्य꣢म् । इ꣣त्था꣢ । वृ꣡षा꣢꣯ । इत् । अ꣣सि । वृ꣡ष꣢꣯जूतिः । वृ꣡ष꣢꣯ । जू꣣तिः । नः । अविता꣢ । वृ꣡षा꣢꣯ । हि । उ꣣ग्र । शृण्विषे꣢ । प꣣राव꣡ति꣢ । वृ꣡षा꣢꣯ । उ꣣ । अर्वाव꣡ति꣢ । श्रु꣣तः꣢ ॥२६३॥

Mantra without Swara
सत्यमित्था वृषेदसि वृषजूतिर्नोऽविता । वृषा ह्युग्र शृण्विषे परावति वृषो अर्वावति श्रुतः ॥

सत्यम् । इत्था । वृषा । इत् । असि । वृषजूतिः । वृष । जूतिः । नः । अविता । वृषा । हि । उग्र । शृण्विषे । परावति । वृषा । उ । अर्वावति । श्रुतः ॥२६३॥

Samveda - Mantra Number : 263
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(उग्र) हे तेजस्विन्निन्द्र ! परमेश्वर ! (इत्या) यह (सत्यम्) सत्य है कि आप (वृषा इत्) [धर्मार्थ काम मोक्षों के] वर्षाने वाले ही (असि) हैं। (वृषजूतिः) आपकी व्याप्ति उक्त पदार्थों को वर्षाती है। (नः अविता) आप हमारे रक्षक हैं। (हि) इसी हेतु (वृषा) वृषा नाम से (शृण्विषे) आप वेदों में सुने जाते हैं (परावति) दूर देश (उ) और (अर्वावति) समीप देश में (वृषा) वर्षाने वाले (श्रुतः) आप विख्यात हैं।
भौतिक पक्ष में: — इन्द्र वर्षा करने वाला होने से ठीक सब संगति जानिये॥
Footnote
ऋ० ८। ३३। १० में में “नोवृतः” पाठ है॥