Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 259

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
इ꣢न्द्र꣣ क्र꣡तुं꣢ न꣣ आ꣡ भ꣢र पि꣣ता꣢ पु꣣त्रे꣢भ्यो꣣ य꣡था꣢ । शि꣡क्षा꣢ णो अ꣣स्मि꣡न्पु꣢रुहूत꣣ या꣡म꣢नि जी꣣वा꣡ ज्योति꣢꣯रशीमहि ॥२५९॥

इ꣢न्द्र꣢꣯ । क्र꣡तु꣢꣯म् । नः꣣ । आ꣢ । भ꣣र । पिता꣢ । पु꣣त्रे꣡भ्यः꣢ । पु꣣त् । त्रे꣡भ्यः꣢꣯ । य꣡था꣢꣯ । शि꣡क्ष꣢꣯ । नः꣣ । अस्मि꣢न् । पु꣣रुहूत । पुरु । हूत । या꣡म꣢꣯नि । जी꣣वाः꣢ । ज्यो꣡तिः꣢꣯ । अ꣣शीमहि ॥२५९॥

Mantra without Swara
इन्द्र क्रतुं न आ भर पिता पुत्रेभ्यो यथा । शिक्षा णो अस्मिन्पुरुहूत यामनि जीवा ज्योतिरशीमहि ॥

इन्द्र । क्रतुम् । नः । आ । भर । पिता । पुत्रेभ्यः । पुत् । त्रेभ्यः । यथा । शिक्ष । नः । अस्मिन् । पुरुहूत । पुरु । हूत । यामनि । जीवाः । ज्योतिः । अशीमहि ॥२५९॥

Samveda - Mantra Number : 259
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
इन्द्र अर्थात् परमेश्वर से पूर्व मन्त्रोक्त ज्योति का दान माँगते हैं — (इन्द्र) हे परमेश्वर ! आप (नः) हमारे लिए (क्रतुम्) सुकर्म वा अपना [ब्रह्म] ज्ञान (भर) दीजिए। इसमें दृष्टान्त — (यथा) जैसे (पिता) पिता (पुत्रेभ्यः) पुत्रों के लिए धन और ज्ञान देता है तद्वत्। (नः) हमको (शिक्ष) शिक्षा दीजिए (पुरुहूत) हे बहुस्तुत ! (यामनि) सबको प्राप्त करने योग्य (अस्मिन्) इस प्रकरणगत मुझ ब्रह्म में (जीवाः) हम जीववर्ग (ज्योतिः) आप की ज्योति को (अशीमहि) सेवित करें॥
ऋतु कर्म वा प्रज्ञा का नाम है॥
Footnote
निघण्टु २। १ और ३। ९ में देखिये, जो एतद्देशीय वा परदेशीय विद्वान् कहते हैं कि “इन्द्रादि पदों से परमेश्वर का ग्रहण प्राचीन लोग नहीं करते थे और यह नई खेंचातानी हैं” उन्हें इस मन्त्र का सायणभाष्य देखना चाहिए क्योंकि इसमें सायणाचार्य ने भी परमात्मा अर्थ किया है॥
ऋ० ७। ३२। २६ में भी॥