Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 249

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथिर्मेध्यातिथिर्वा काण्वः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
इ꣢न्द्र꣣मि꣢द्दे꣣व꣡ता꣢तय꣣ इ꣡न्द्रं꣢ प्रय꣣꣬त्य꣢꣯ध्व꣣रे꣢ । इ꣡न्द्र꣢ꣳ समी꣣के꣢ व꣣नि꣡नो꣢ हवामह꣣ इ꣢न्द्रं꣣ ध꣡न꣢स्य सा꣣त꣡ये꣢ ॥२४९॥

इ꣡न्द्र꣢꣯म् । इत् । दे꣣व꣡ता꣢तये । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । प्र꣣यति꣢ । प्र꣣ । यति꣢ । अ꣣ध्वरे꣢ । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । स꣣मीके꣢ । स꣣म् । ईके꣢ । व꣣नि꣡नः꣢ । ह꣣वामहे । इ꣡न्द्र꣢म् । ध꣡न꣢꣯स्य । सा꣣त꣡ये꣢ ॥२४९॥

Mantra without Swara
इन्द्रमिद्देवतातय इन्द्रं प्रयत्यध्वरे । इन्द्रꣳ समीके वनिनो हवामह इन्द्रं धनस्य सातये ॥

इन्द्रम् । इत् । देवतातये । इन्द्रम् । प्रयति । प्र । यति । अध्वरे । इन्द्रम् । समीके । सम् । ईके । वनिनः । हवामहे । इन्द्रम् । धनस्य । सातये ॥२४९॥

Samveda - Mantra Number : 249
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
हम (देवतातये) यज्ञ के लिये (इन्द्रम् इत्) परमेश्वर की ही (हवामहे) पुकार करें। (अध्वरे) यज्ञ (प्रयति) आरम्भ होने पर (इन्द्रम्) परमेश्वर की पुकार करें। (समीके) यज्ञ समाप्ति वा युद्ध में भी (इन्द्रम्) परमात्मा की सहायता माँगें। (वनिनः) संविभाग करते हुए हम (धनस्य) धन के (सातये) दान मिलने के लिये (इन्द्रम्) परमेश्वर की सहायता माँगें॥
प्रत्येक शुभ कार्य के प्रारम्भ और समाप्ति में, युद्धादि विपत्ति के समयों में, व्यापारादि धन लाभ के अवसरों में सदा परमेश्वर की ही सहायता मांगनी चाहिये॥
Footnote
निघण्टु २। १७॥ ३। १७ के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥
ऋग्वेद ८। ३। ५ में भी॥