Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 244

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथि0मेध्यातिथी काण्वौ Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
य꣢ ऋ꣣ते꣡ चि꣢द꣣भिश्रि꣡षः꣢ पु꣣रा꣢ ज꣣त्रु꣡भ्य꣢ आ꣣तृ꣡दः꣢ । स꣡न्धा꣢ता स꣣न्धिं꣢ म꣣घ꣡वा꣢ पुरू꣣व꣢सु꣣र्नि꣡ष्क꣢र्ता꣣ वि꣡ह्रु꣢तं꣣ पु꣡नः꣢ ॥२४४॥

यः꣢ । ऋ꣣ते꣢ । चि꣣त् । अभिश्रि꣡षः꣢ । अ꣣भि । श्रि꣡षः꣢꣯ । पु꣣रा꣢ । ज꣣त्रु꣡भ्यः꣢ । आ꣣तृ꣡दः꣢ । आ꣣ । तृ꣡दः꣢꣯ । स꣡न्धा꣢꣯ता । स꣣म् । धा꣣ता । सन्धि꣢म् । स꣣म् । धि꣢म् । म꣣घ꣡वा꣢ । पु꣣रूव꣡सुः꣢ । पु꣣रु । व꣡सुः꣢꣯ । नि꣡ष्क꣢꣯र्ता । निः । क꣣र्त्ता । वि꣡ह्रु꣢꣯तम् । वि । ह्रु꣣तम् । पु꣢नरि꣡ति꣢ ॥२४४॥

Mantra without Swara
य ऋते चिदभिश्रिषः पुरा जत्रुभ्य आतृदः । सन्धाता सन्धिं मघवा पुरूवसुर्निष्कर्ता विह्रुतं पुनः ॥

यः । ऋते । चित् । अभिश्रिषः । अभि । श्रिषः । पुरा । जत्रुभ्यः । आतृदः । आ । तृदः । सन्धाता । सम् । धाता । सन्धिम् । सम् । धिम् । मघवा । पुरूवसुः । पुरु । वसुः । निष्कर्ता । निः । कर्त्ता । विह्रुतम् । वि । ह्रुतम् । पुनरिति ॥२४४॥

Samveda - Mantra Number : 244
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
पूर्वोक्त इन्द्र का ही वर्णन करते हैं — (यः) जो (मघवा) इन्द्र अर्थात् परमेश्वर (पुरुवसुः) बहु वास हेतु (जत्रुभ्यः) ग्रीवादि जोड़ों से (आतृदः) रुधिरोत्पत्ति से (पुरा) पहले ही (अभिश्रिषः) चिपकाने के वा जोड़ने के साधन रस्सी आदि के (ऋते चित्) बिना ही (सन्धिम्) जोड़ को (सन्धाता) जोड़ देता है (पुनः) और (विह्नतम) शीघ्र ही जब चाहे तब (निष्कर्त्ता) बिछोड़ा कर देता है॥
परमात्मा के कैसे आश्चर्य के काम हैं कि गर्भगत प्राणियों के ग्रीवादि अवयवों को चिपकाने के लिये जब तक रुधिर भी नहीं उत्पन्न होता है, तभी समस्त संधियों को बिना रस्सी आदि साधनों के जोड़ देता और जब चाहे, तत्काल पुष्ट से पुष्ट बंधनों को तोड़-बिछोड़ देता है।
Footnote
ऋ० ८।१।१२ में ‘इष्कर्त्ता विरुतम्’ पाठ है॥