Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 24

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
अ꣢ग्ने꣣ र꣡क्षा꣢ णो꣣ अ꣡ꣳह꣢सः꣣ प्र꣡ति꣢ स्म देव रीष꣣तः꣢ । त꣡पि꣢ष्ठैर꣣ज꣡रो꣢ दह ॥२४॥

अ꣡ग्ने꣢꣯ । र꣡क्ष꣢꣯ । नः꣣ । अँ꣡ह꣢꣯सः । प्र꣡ति꣢꣯ । स्म꣣ । देव । रीषतः꣢ । त꣡पि꣢꣯ष्ठैः । अ꣣ज꣡रः꣢ । अ꣣ । ज꣡रः꣢꣯ । द꣣ह ॥२४॥

Mantra without Swara
अग्ने रक्षा णो अꣳहसः प्रति स्म देव रीषतः । तपिष्ठैरजरो दह ॥

अग्ने । रक्ष । नः । अँहसः । प्रति । स्म । देव । रीषतः । तपिष्ठैः । अजरः । अ । जरः । दह ॥२४॥

Samveda - Mantra Number : 24
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(अग्ने) सदुपदेशकेश्वर ! (नः) हमारी (रक्ष) रक्षा करो (देव) हे परमात्मन् ! (अजरः) आप अजर हैं, (अंहसः) पापियों और विशेषतः (रीषतः) ! हिंसकों को (तपिष्ठैः) तीव्र तेजों से (प्रति, दह, स्म) भस्म करो॥
भौतिक पक्ष में— (अग्ने) अग्ने ! (नः) हमारी (रक्ष) रक्षा करो और (देव) दिव्यगुणयुक्त ! (अजरः) शिथिलतारहित तू, (अंहसः) अन्यायी (रीषतः) हिंसकों को (तपिष्ठैः) अत्यन्न तेजस्वी अस्त्रों से (प्रति, दह, स्म) भस्म कर॥
अर्थात् अग्नि दिव्यगुणयुक्त देव और शिथिलतारहित अजर होता हुआ उससे सिद्ध हुए अस्त्रों द्वारा अन्यायियों के दमन और धर्मात्माओं की रक्षा में प्रयुक्त करना चाहिये॥
Footnote
अष्टाध्यायी ६।३।१३३॥ ६।३।१३५॥ ८। ४।२६॥ उणादि ४।२१३॥ के प्रमाण संस्कृतभाग्य में देखिये। ऋग्वेद ७।१५।१३ में “स्म” के स्थान में “ष्म” इतना पाठभेद है॥