Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 239

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
पि꣡बा꣢ सु꣣त꣡स्य꣢ र꣣सि꣢नो꣣ म꣡त्स्वा꣢ न इन्द्र꣣ गो꣡म꣢तः । आ꣣पि꣡र्नो꣢ बोधि सध꣣मा꣡द्ये꣢ वृ꣣धे꣢३ऽस्मा꣡ꣳ अ꣢वन्तु ते꣣ धि꣡यः꣢ ॥२३९॥

पि꣡बा꣢꣯ । सु꣣त꣡स्य꣢ । र꣣सि꣡नः꣢ । म꣡त्स्व꣢꣯ । नः꣣ । इन्द्र । गो꣡म꣢꣯तः । आ꣣पिः꣢ । नः꣣ । बोधि । सधमा꣡द्ये꣢ । स꣣ध । मा꣡द्ये꣢꣯ । वृ꣣धे꣢ । अ꣣स्मा꣢न् । अ꣣वन्तु । ते । धि꣡यः꣢꣯ ॥२३९॥

Mantra without Swara
पिबा सुतस्य रसिनो मत्स्वा न इन्द्र गोमतः । आपिर्नो बोधि सधमाद्ये वृधे३ऽस्माꣳ अवन्तु ते धियः ॥

पिबा । सुतस्य । रसिनः । मत्स्व । नः । इन्द्र । गोमतः । आपिः । नः । बोधि । सधमाद्ये । सध । माद्ये । वृधे । अस्मान् । अवन्तु । ते । धियः ॥२३९॥

Samveda - Mantra Number : 239
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) परमेश्वर ! आप (गोमतः) गवादि पशु वाले यज्ञकर्त्ता के (रसिनः) रसीले (सुतस्य) आपकी भक्तियोग्य सम्पादित मन का (पिब) ग्रहण कीजिये और (नः) हमारे लिये (मत्स्व) प्रसन्न अनुकूल हूजिये। (आपिः) आप व्यापक हैं (नः) हमको अन्तर्यामितया (बोधि) ज्ञान दीजिये (सधमाद्ये) योगयज्ञ में (वृधे) उन्नति के लिये (ते) आपकी (धियः) प्रज्ञा के प्रसाद (अस्मान्) हमारी (अवन्तु) रक्षा करें।
हे परमेश्वर ! जो लोग गवादि पशु वाले हैं और घृतादि से कर्मयज्ञ करते हैं जिनका मन रसिक है, ऐसी कृपा कीजिये कि उनका मन शुद्ध होके श्रद्धा भक्तिपूर्वक आपका शरण ग्रहण करे। आप हम पर प्रसन्न हों। आप अन्तर्यामिरूप से हमारी बुद्धि को सुधारिये, ज्ञान दीजिये। आपका दिया बुद्धि का प्रसाद हमारी रक्षा करे॥
Footnote
ऋ० ८। ३। १ में भी॥