Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 236

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- नोधा गौतमः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
तं꣡ वो꣢ द꣣स्म꣡मृ꣢꣫ती꣣ष꣢हं꣣ व꣡सो꣢र्मन्दा꣣न꣡मन्ध꣢꣯सः । अ꣣भि꣢ व꣣त्सं꣡ न स्वस꣢꣯रेषु धे꣣न꣢व꣣ इ꣡न्द्रं꣢ गी꣣र्भि꣡र्न꣢वामहे ॥२३६॥

त꣢म् । वः꣣ । दस्म꣢म् । ऋ꣣तीष꣡ह꣢म् । ऋ꣣ति । स꣡ह꣢꣯म् । व꣡सोः꣢꣯ । म꣣न्दान꣢म् । अ꣡न्ध꣢꣯सः । अ꣣भि꣢ । व꣣त्स꣢म् । न । स्व꣡स꣢꣯रेषु । धे꣣न꣡वः꣣ । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । गी꣣र्भिः꣢ । न꣣वामहे ॥२३६॥

Mantra without Swara
तं वो दस्ममृतीषहं वसोर्मन्दानमन्धसः । अभि वत्सं न स्वसरेषु धेनव इन्द्रं गीर्भिर्नवामहे ॥

तम् । वः । दस्मम् । ऋतीषहम् । ऋति । सहम् । वसोः । मन्दानम् । अन्धसः । अभि । वत्सम् । न । स्वसरेषु । धेनवः । इन्द्रम् । गीर्भिः । नवामहे ॥२३६॥

Samveda - Mantra Number : 236
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
हे उपासको ! (वः) तुम्हारे (ऋतीषहम्) कामादि शत्रुओं के तिरस्कार करने वाले (दस्मम्) उनका क्षय करने वाले (तम्) उस (इन्द्रम्) परमेश्वर को (गीर्भिः) वेदमन्त्रों से (अभि, नवामहे) हम सर्वथा स्तुत करते हैं पुकारते हैं। दृष्टान्त—(न) जैसे (धेनवः) गौवें (स्वसरेषु) गोगृहों में (वसोः) वासहेतु (अन्धसः) अन्न से (मन्दानम्) मोदमान हृष्ट पुष्ट (वत्सम्) बछड़े को (अभि) देखकर [हृदय की प्रीति से पुकारती हैं। तद्वत्]॥
जो लोग “अन्न से मोदमान हृष्ट पुष्ट” पदों को परमात्मा का विशेषण करते हैं, वे भ्रान्त हैं। क्योंकि “अनश्नन्न०” ऋ० १। १६४। २० में परमात्मा को भोगरहित कहा है तथा अन्य अनेक वाक्यों में भी॥
Footnote
उणादि १। १४५ निघण्टु ३। ४ इत्यादि के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥ ऋ० ८। ८८। १। में भी॥