Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 234

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
त्वा꣡मिद्धि हवा꣢꣯महे सा꣣तौ꣡ वाज꣢꣯स्य का꣣र꣡वः꣢ । त्वां꣢ वृ꣣त्रे꣡ष्वि꣢न्द्र꣣ स꣡त्प꣢तिं꣣ न꣢र꣣स्त्वां꣢꣫ काष्ठा꣣स्व꣡र्व꣢तः ॥२३४॥

त्वा꣢म् । इत् । हि । ह꣡वा꣢꣯महे । सा꣣तौ꣢ । वा꣡ज꣢꣯स्य । का꣣र꣡वः꣢ । त्वाम् । वृ꣣त्रे꣡षु꣢ । इ꣣न्द्र । स꣡त्प꣢꣯तिम् । सत् । प꣣तिम् । न꣡रः꣢꣯ । त्वाम् । का꣡ष्ठा꣢꣯सु । अ꣡र्व꣢꣯तः ॥२३४॥

Mantra without Swara
त्वामिद्धि हवामहे सातौ वाजस्य कारवः । त्वां वृत्रेष्विन्द्र सत्पतिं नरस्त्वां काष्ठास्वर्वतः ॥

त्वाम् । इत् । हि । हवामहे । सातौ । वाजस्य । कारवः । त्वाम् । वृत्रेषु । इन्द्र । सत्पतिम् । सत् । पतिम् । नरः । त्वाम् । काष्ठासु । अर्वतः ॥२३४॥

Samveda - Mantra Number : 234
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) हे परमात्मन् ! (अर्वतः) अश्वादि के चढ़ने वाले वीर (नरः) पुरुष (वृत्रेषु) शत्रुओं से घेरे जाने पर (त्वाम्) आप का [सहारा लेते हैं] (काष्ठासु) सब दिशाओं में (सत्पतिम्) सज्जनों के रक्षक (त्वाम्) आप को [भजते हैं अतः] (कारवः) हम स्तोता भक्तजन भी (वाजस्य) बल के (सातौ) दान निमित्त (त्वाम्, इत्, हि) आपको ही (हवामहे) पुकारते हैं।
जिस प्रकार सब दिशाओं में सज्जनों के रक्षक आप परमात्मा को, शत्रुओं की भीड़ पड़ने पर, बल प्राप्त करने के लिए, वीर पुरुष पुकारते हैं; इसी प्रकार हे भगवन् ! हम भक्तजन भी कामादि शत्रुगण की भीड़ में उनके परास्त करने को बल का दान आप से मांगते हैं।
Footnote
निघण्टु ३। १६॥ १। १४ का प्रमाण संस्कृत भाष्य में देखिये॥
ऋ० ६। ४६। १ में “साता” यह पाठभेद है॥