Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 232

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- श्रुतकक्ष आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
ए꣣वा꣡ ह्यसि꣢꣯ वीर꣣यु꣢रे꣣वा꣡ शूर꣢꣯ उ꣣त꣢ स्थि꣣रः꣢ । ए꣣वा꣢ ते꣣ रा꣢ध्यं꣣ म꣡नः꣢ ॥२३२॥

ए꣣व꣢ । हि । अ꣡सि꣢꣯ । वी꣣रयुः꣢ । ए꣣व꣢ । शू꣣रः꣢ । उ꣣त꣢ । स्थि꣣रः꣢ । ए꣣व꣢ । ते꣣ । रा꣡ध्य꣢꣯म् । म꣡नः꣢꣯ ॥२३२॥

Mantra without Swara
एवा ह्यसि वीरयुरेवा शूर उत स्थिरः । एवा ते राध्यं मनः ॥

एव । हि । असि । वीरयुः । एव । शूरः । उत । स्थिरः । एव । ते । राध्यम् । मनः ॥२३२॥

Samveda - Mantra Number : 232
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 12;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
प्रकरण से हे इन्द्र ! राजन् ! आप (वीरयुः) वीरों को चाहने वाले (एव) निश्चय (असि) हैं। आप (शूरः) शूरवीर (एव) निश्चय हैं (उत) और आप (स्थिरः) दृढ़ (एव) भी हैं। अतः (ते) आपका (मनः) हृदय (राध्यम्) प्रशंसायोग्य है।
Footnote
ऋ० ८। ९२। २८ में भी॥