Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 21

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- प्रयोगो भार्गवः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
अ꣣ग्निं꣡ वो꣢ वृ꣣ध꣡न्त꣢मध्व꣣रा꣡णां꣢ पुरू꣣त꣡म꣢म् । अ꣢च्छा꣣ न꣢प्त्रे꣣ स꣡ह꣢स्वते ॥२१॥

अ꣣ग्नि꣢म् । वः꣣ । वृध꣡न्त꣢म् । अ꣣ध्वरा꣡णा꣢म् । पु꣣रूत꣡म꣢म् । अ꣡च्छ꣢꣯ । न꣡प्त्रे꣢꣯ । स꣡ह꣢꣯स्वते ॥२१॥

Mantra without Swara
अग्निं वो वृधन्तमध्वराणां पुरूतमम् । अच्छा नप्त्रे सहस्वते ॥

अग्निम् । वः । वृधन्तम् । अध्वराणाम् । पुरूतमम् । अच्छ । नप्त्रे । सहस्वते ॥२१॥

Samveda - Mantra Number : 21
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(वः) तुम्हारे (अध्वराणाम्) ज्ञानयज्ञों को (पुरूतमम्) अतिशयित (वृधन्तम्) बढ़ाते हुए (नप्त्रे) बन्धुतुल्य सहायक (सहस्वते) बलवान् (अग्निम) तेजोमय परमात्मा को (अच्छ) तुम अच्छे प्रकार उपासित करो॥
परमात्मा तुम्हारे ज्ञान का सहायक है और बढ़ाने वाला है तथा बल का धारण करने वाला और वल का दाता है। तुम उसकी अच्छे प्रकार उपासना करो॥
भौतिक पक्ष में:—(वः) तुम्हारे (अध्वराणाम्) कर्मयज्ञों की (पुरूतमम्) अतिशयित (वृधन्तम्) वृद्धि करते हुए (नप्त्रे) बन्धुतुल्य सहायक (सहस्वते) बलवान् (अग्निम्) अग्नि को (अच्छ) भले प्रकार प्रयुक्त करो॥
अर्थात् अग्नि तुम्हारे समस्त देवयजन शिल्प युद्धादि क्रियाकलाप की अत्यन्त सहायता करने वाला है, वह तुम्हारा बन्धु के तुल्य सहायक है। जिस प्रकार बान्धव लोग अपने कार्यों की सहायता करते हैं, इसी प्रकार अग्नि भी सहस्रों भाइयों का काम अकेला ही करता है। मेघमण्डलादि दूतवर्ती स्थानों में तुम्हारे इष्टसाधक यज्ञ को फैलाता है, शिल्पविद्या में प्रयुक्त होकर अनेकशः कार्यों को साधता, तथा युद्धादि में आग्नेयास्त्रादि द्वारा सहस्रों लक्षों मनुष्यों का काम करता है। इसलिये “अच्छे प्रकार” पूर्ण ध्यान से विचार तत्परता से उसके प्रयोग करने में प्रवृत्त होओ।
Footnote
अष्टाध्यायी ६।३।१३६ उरणादि २। ९५ के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥ ऐसी ही ऋचा ऋ० ८। ९१। ७ में है॥