Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 209

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
अ꣡रं꣢ त इन्द्र꣣ श्र꣡व꣢से ग꣣मे꣡म꣢ शूर꣣ त्वा꣡व꣢तः । अ꣡र꣢ꣳ शक्र꣣ प꣡रे꣢मणि ॥२०९

अ꣡र꣢꣯म् । ते꣣ । इन्द्र । श्र꣡व꣢꣯से । ग꣣मे꣡म꣢ । शू꣣र । त्वा꣡व꣢꣯तः । अ꣡र꣢꣯म् । श꣣क्र । प꣡रे꣢꣯मणि ॥२०९॥

Mantra without Swara
अरं त इन्द्र श्रवसे गमेम शूर त्वावतः । अरꣳ शक्र परेमणि ॥२०९

अरम् । ते । इन्द्र । श्रवसे । गमेम । शूर । त्वावतः । अरम् । शक्र । परेमणि ॥२०९॥

Samveda - Mantra Number : 209
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 10;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(शक्र) हे सर्वशक्तिमन् ! (शूर) हे परमसामर्थ्ययुक्त ! (इन्द्र) परमेश्वर ! (त्वावतः) अपने से तुल्य (ते) आप के (श्रवसे) यश के लिये (अरं, गमेम) सदा सर्वथा प्राप्त होवें और (परेमणि) मोक्षदायक समाधि में (अरम्) हम सर्वथा प्राप्त होवें॥
हे परमेश्वर ! आप सर्वशक्तिमान् और अनन्त सामर्थ्ययुक्त हैं। आप ही अपने तुल्य हैं। हमको ऐसा सामर्थ्य दीजिये जिससे आपके यश और ध्यान में तत्पर होकर मोक्ष को प्राप्त हों॥ ६॥
Footnote
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