Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 205

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
अ꣡सृ꣢ग्रमिन्द्र ते꣣ गि꣢रः꣣ प्र꣢ति꣣ त्वा꣡मुद꣢꣯हासत । स꣣जो꣡षा꣢ वृष꣣भं꣡ पति꣢꣯म् ॥२०५॥

अ꣡सृ꣢꣯ग्रम् । इ꣣न्द्र । ते । गि꣡रः꣢꣯ । प्र꣡ति꣢꣯ । त्वाम् । उत् । अ꣣हासत । सजो꣡षाः꣢ । स꣣ । जो꣡षाः꣢꣯ । वृ꣣षभ꣢म् । प꣡ति꣢꣯म् ॥२०५॥

Mantra without Swara
असृग्रमिन्द्र ते गिरः प्रति त्वामुदहासत । सजोषा वृषभं पतिम् ॥

असृग्रम् । इन्द्र । ते । गिरः । प्रति । त्वाम् । उत् । अहासत । सजोषाः । स । जोषाः । वृषभम् । पतिम् ॥२०५॥

Samveda - Mantra Number : 205
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 10;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) परमेश्वर ! (ते) आप की (गिरः) वेदवाणी को (अहम्) मैं (सजोषाः) साथ सेवित करता हुआ (असृग्रम्) वर्णन करता हूँ वे वेदवाणियें (त्वा प्रति) आप को (उदहासत) उच्च भाव से प्राप्त कराती हैं। जो कि आप (वृषभम्) धर्मार्थ काम मोक्ष के वर्षाने वाले और (पतिम्) पालनकर्त्ता हैं, उनको॥
Footnote
अष्टाध्यायी ७। १। ८ निरुक्त १। ३ के प्रमाण संस्कृतभाव नें देखिये॥ ऋ० १। ६। ४ में “अजोषा” पाठ है॥