Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 198

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
इ꣢न्द्र꣣मि꣢द्गा꣣थि꣡नो꣢ बृ꣣ह꣡दिन्द्र꣢꣯म꣣र्के꣡भि꣢र꣣र्कि꣡णः꣢ । इ꣢न्द्रं꣣ वा꣡णी꣢रनूषत ॥१९८॥

इ꣡न्द्र꣢꣯म् । इत् । गा꣣थि꣡नः꣢ । बृ꣣ह꣢त् । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । अ꣣र्के꣡भिः । अ꣣र्कि꣡णः꣢ । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । वा꣡णीः꣢꣯ । अ꣣नूषत ॥१९८॥

Mantra without Swara
इन्द्रमिद्गाथिनो बृहदिन्द्रमर्केभिरर्किणः । इन्द्रं वाणीरनूषत ॥

इन्द्रम् । इत् । गाथिनः । बृहत् । इन्द्रम् । अर्केभिः । अर्किणः । इन्द्रम् । वाणीः । अनूषत ॥१९८॥

Samveda - Mantra Number : 198
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 9;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(गाथिनः) गीयमान साम के गाने वाले उद्गाता लोग (इन्द्रम्) परमेश्वर को (इत्) ही (बृहत्) बहुत (अनूषत) स्तुत करते हैं (अर्किणः) मन्त्रवाले होता लोग (इन्द्रम्) परमेश्वर को (अर्केभिः) ऋग्वेद के मन्त्रों से स्तुत करते हैं। शेष अध्वर्यु लोग (इन्द्रम्) परमेश्वर को (वाणीः) यजुर्वेद की वाणियों से स्तुत करते हैं॥
Footnote
निरुक्त ५। ४ का प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥ ऋ० १। ७। १ में भी॥