Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1841

1875 Mantra
Devata- वायुः Rishi- उलो वातायनः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ꣣त꣡ वा꣢त पि꣣ता꣡सि꣢ न उ꣣त꣢꣫ भ्रातो꣣त꣢ नः꣣ स꣡खा꣢ । स꣡ नो꣢ जी꣣वा꣡त꣢वे कृधि ॥१८४१॥

उ꣣त꣢ । वा꣢त । पिता꣢ । अ꣣सि । नः । उत꣢ । भ्रा꣡ता꣢꣯ । उ꣣त꣢ । नः꣣ । स꣡खा꣢꣯ । स । खा꣣ । सः꣢ । नः꣣ । जीवा꣡त꣢वे । कृ꣣धि ॥१८४१॥

Mantra without Swara
उत वात पितासि न उत भ्रातोत नः सखा । स नो जीवातवे कृधि ॥

उत । वात । पिता । असि । नः । उत । भ्राता । उत । नः । सखा । स । खा । सः । नः । जीवातवे । कृधि ॥१८४१॥

Samveda - Mantra Number : 1841
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 9; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 20; Khand » 7;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(उत) और (वात) हे वायो ! तू (नः) हमारा (पिता) पालक (उत) और (भ्राता) सहायक (उत) और (नः) हमारा (सखा) मित्र हितकर (असि) है (सः) वह तू (नः) हमको (जीवातवे) जीवन के लिये (कृधि) समर्थ कर॥
यथाविधि वायु का सेवन करने वालों का वायु ही पिता भ्राता और मित्र के समान गुणकारी उपकारी होकर उनको दीर्घजीवन देता है। वायु जीवन है। इसमें सन्देह नहीं॥
Footnote
ऋ० १०। १८६। २ में भी॥