Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1811

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- जमदग्निर्भार्गवः Chhand- द्विपदा गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ते꣢ सु꣣ता꣡सो꣢ विप꣣श्चि꣡तः꣢ शु꣣क्रा꣢ वा꣣यु꣡म꣢सृक्षत ॥१८११॥

ते । सु꣣ता꣡सः꣢ । वि꣣पश्चि꣡तः꣢ । वि꣣पः । चि꣡तः꣢꣯ । शु꣣क्राः꣢ । वा꣣यु꣢म् । अ꣣सृक्षत ॥१८११॥

Mantra without Swara
ते सुतासो विपश्चितः शुक्रा वायुमसृक्षत ॥

ते । सुतासः । विपश्चितः । विपः । चितः । शुक्राः । वायुम् । असृक्षत ॥१८११॥

Samveda - Mantra Number : 1811
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 9; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 20; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(सुतासः) अभिषुत किये हुए (विपश्चितः) बुद्धितत्त्वयुक्त बुद्धिवर्धक (शुक्राः) वीर्यवान् वीर्यवर्धक (ते) वे सोम (वायुम्) इन्द्रनामक वायुविशेष को (असृक्षत) उत्पन्न करते बढ़ाते हैं।
Footnote
ऋग्वेद ९। ६७। १८ का पाठभेद संस्कृतभाष्य में देखिये॥