Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1775

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- दीर्घतमा औचथ्यः Chhand- विराडनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
अ꣣भि꣢ द्वि꣣ज꣢न्मा꣣ त्री꣡ रो꣢च꣣ना꣢नि꣣ वि꣢श्वा꣣ र꣡जा꣢ꣳसि शुशुचा꣣नो꣡ अ꣢स्थात् । हो꣢ता꣣ य꣡जि꣢ष्ठो अ꣣पा꣢ꣳ स꣣ध꣡स्थे꣢ ॥१७७५॥

अभि꣢ । द्वि꣣ज꣡न्मा꣢ । द्वि꣣ । ज꣡न्मा꣢꣯ । त्रि । रो꣣चना꣡नि꣢ । वि꣡श्वा꣢꣯ । र꣡जा꣢꣯ꣳसि । शु꣣शुचानः꣢ । अ꣣स्थात् । हो꣡ता꣢꣯ । य꣡जि꣢꣯ष्ठः । अ꣣पा꣢म् । स꣣ध꣡स्थे꣢ । स꣣ध꣢ । स्थे꣣ ॥१७७५॥

Mantra without Swara
अभि द्विजन्मा त्री रोचनानि विश्वा रजाꣳसि शुशुचानो अस्थात् । होता यजिष्ठो अपाꣳ सधस्थे ॥

अभि । द्विजन्मा । द्वि । जन्मा । त्रि । रोचनानि । विश्वा । रजाꣳसि । शुशुचानः । अस्थात् । होता । यजिष्ठः । अपाम् । सधस्थे । सध । स्थे ॥१७७५॥

Samveda - Mantra Number : 1775
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 9; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 20; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(द्विजन्मा) दो अरणियों से उत्पन्न होने से द्विजन्मा वा एक बार मन्थन से और दूसरी बार आवान पवमान इष्टि आदि संस्कार से जन्म होने के कारण से द्विजन्मा अथवा द्युलोक भूलोक से उत्पत्ति के कारण से द्विजन्मा अग्नि (त्री) तीन (रोचनानि) प्रकाशमान पृथिव्यादि ३ लोकों वा गार्हपत्यादि ३ अपने भेदों को और (विश्वा) सब (रजांसि) लोकान्तरों को (शुशुचानः) प्रकाशता हुआ (होता) देवों का आवाहन करने वाला (यजिष्ठः) उनका अत्यन्त यजन करने वाला (अभि) चारों ओर (अपाम्) प्रोक्षणी पात्रादिस्थ जलों के (सधस्थे) सहवर्त्ती यज्ञदेश में (अस्थात्) स्थित हो = स्थापित किया जावे॥
Footnote
ऋ० १। १४९। ४ में भी॥