Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1764

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अवत्सारः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स꣢ नो꣣ वि꣡श्वा꣢ दि꣣वो꣢꣫ वसू꣣तो꣡ पृ꣢थि꣣व्या꣡ अधि꣢꣯ । पु꣣नान꣡ इ꣢न्द꣣वा꣡ भ꣢र ॥१७६४॥

सः꣢ । नः꣣ । वि꣡श्वा꣢꣯ । दि꣣वः꣢ । व꣡सु꣢꣯ । उ꣣त꣢ । उ꣢ । पृथिव्याः꣢ । अ꣡धि꣢꣯ । पु꣣नानः꣢ । इ꣣न्दो । आ꣡ । भ꣢र ॥१७६४॥

Mantra without Swara
स नो विश्वा दिवो वसूतो पृथिव्या अधि । पुनान इन्दवा भर ॥

सः । नः । विश्वा । दिवः । वसु । उत । उ । पृथिव्याः । अधि । पुनानः । इन्दो । आ । भर ॥१७६४॥

Samveda - Mantra Number : 1764
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 19; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(इन्दो) सोम ! (पुनानः) अभिषुत किया जाता हुआ (सः) वह तू (नः) हमारे लिये (दिवः) प्राकाश के (उतो) और (पृथिव्याः) पृथिवी के (विश्वा) सब (वसु) धन (अधि) अधिकता से (आभर) ला दे॥
Footnote
ऋग्वेद ९। ५७। ४ में भी॥