Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 176

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- गोधा ऋषिका Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
न꣡कि꣢ देवा इनीमसि꣣ न꣡ क्या यो꣢꣯पयामसि । म꣣न्त्र꣡श्रु꣢त्यं चरामसि ॥१७६॥

न꣢ । कि꣣ । देवाः । इनीमसि । न꣢ । कि꣣ । आ꣢ । यो꣣पयामसि । मन्त्रश्रु꣡त्य꣢म् । म꣣न्त्र । श्रु꣡त्य꣢꣯म् । च꣣रामसि ॥१७६॥

Mantra without Swara
नकि देवा इनीमसि न क्या योपयामसि । मन्त्रश्रुत्यं चरामसि ॥

न । कि । देवाः । इनीमसि । न । कि । आ । योपयामसि । मन्त्रश्रुत्यम् । मन्त्र । श्रुत्यम् । चरामसि ॥१७६॥

Samveda - Mantra Number : 176
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 7;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(देवाः) हम उपासक लोग (नकि, इनीमसि) हिंसा न करें (आ) सब ओर से (नकि योपयामसि) किसी को अज्ञानयुक्त, न करें और (मन्त्रश्रुत्यम्) वेदोक्त कर्मों का (चरामसि) अनुष्ठान करें॥
Footnote
अष्टाध्यायी ७।३।८१॥ ७। १। ४६ इत्यादि के प्रमाण तथा ऋ० १०। १३४। ७ का अन्तर संस्कृतभाष्य में देखिये॥