Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1729

1875 Mantra
Devata- अश्विनौ Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
या꣢ द꣣स्रा꣡ सिन्धु꣢꣯मातरा मनो꣣त꣡रा꣢ रयी꣣णा꣢म् । धि꣣या꣢ दे꣣वा꣡ व꣢सु꣣वि꣡दा꣢ ॥१७२९॥

या꣢ । द꣣स्रा꣢ । सि꣡न्धु꣢꣯मातरा । सि꣡न्धु꣢꣯ । मा꣣तरा । मनोत꣡रा꣢ । र꣣यीणा꣢म् । धि꣣या꣢ । दे꣣वा꣢ । व꣣सुवि꣡दा꣢ । वसु꣣ । वि꣡दा꣢꣯ ॥१७२९॥

Mantra without Swara
या दस्रा सिन्धुमातरा मनोतरा रयीणाम् । धिया देवा वसुविदा ॥

या । दस्रा । सिन्धुमातरा । सिन्धु । मातरा । मनोतरा । रयीणाम् । धिया । देवा । वसुविदा । वसु । विदा ॥१७२९॥

Samveda - Mantra Number : 1729
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 19; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(या) जो, (सिन्धुमातरा) जिनकी माता समुद्र है वे, (रयीणाम्) धनों के (मनोतरा) मन से तिराने वाले (धिया) कर्म से (वसुविदा) धन के लभाने वाले (दस्त्रा) प्राण अपान वा सूर्य चन्द्रमा (देवा) दो देवता हैं [उनकी स्तुति = प्रशंसा करता हूँ —] यह पूर्व मन्त्र से आहृत है।
Footnote
ऋग्वेद १। ४६। २ में भी॥