Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1700

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- निध्रुविः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प꣡व꣢माना दि꣣व꣢꣫स्पर्य꣣न्त꣡रि꣢क्षादसृक्षत । पृ꣣थिव्या꣢꣫ अधि꣣ सा꣡न꣢वि ॥१७००॥

प꣡व꣢꣯मानाः । दि꣣वः꣢ । प꣡रि꣢꣯ । अ꣣न्त꣡रि꣢क्षात् । अ꣣सृक्षत । पृथिव्याः꣣ । अ꣡धि꣢꣯ । सा꣡न꣢꣯वि ॥१७००॥

Mantra without Swara
पवमाना दिवस्पर्यन्तरिक्षादसृक्षत । पृथिव्या अधि सानवि ॥

पवमानाः । दिवः । परि । अन्तरिक्षात् । असृक्षत । पृथिव्याः । अधि । सानवि ॥१७००॥

Samveda - Mantra Number : 1700
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 18; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(पवमानाः) सोम (दिवः) प्रकाशमान (अन्तरिक्षात्) अन्तरिक्ष से (परि) सब ओर (पृथिव्याः) भूमि से (अधि) ऊपर (सानवि) पर्वतों के शिखर पर (असृक्षत) वर्षते हैं, मेघ के साथ॥
Footnote
ऋग्वेद ९। ६३। २७ में भी॥