Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1692

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- कलिः प्रागाथः Chhand- बार्हतः प्रगाथः (विषमा बृहती, समा सतोबृहती) Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
वृ꣡क꣢श्चिदस्य वार꣣ण꣡ उ꣢रा꣣म꣢थि꣣रा꣢ व꣣यु꣡ने꣢षु भूषति । से꣢꣫मं न꣣ स्तो꣡मं꣢ जुजुषा꣣ण꣢꣫ आ ग꣣ही꣢न्द्र꣣ प्र꣢ चि꣣त्र꣡या꣢ धि꣣या꣢ ॥१६९२॥

वृ꣡कः꣢꣯ । चि꣣त् । अस्य । वारणः꣢ । उ꣣राम꣡थिः꣢ । उ꣣रा । म꣡थिः꣢꣯ । आ । व꣣यु꣡ने꣢षु । भू꣣षति । सा꣢ । इ꣣म꣢म् । नः꣣ । स्तो꣡म꣢꣯म् । जु꣣जुषाणः꣢ । आ । ग꣣हि । इ꣡न्द्र꣢꣯ । प्र । चि꣣त्र꣡या । धि꣣या꣢ ॥१६९२॥

Mantra without Swara
वृकश्चिदस्य वारण उरामथिरा वयुनेषु भूषति । सेमं न स्तोमं जुजुषाण आ गहीन्द्र प्र चित्रया धिया ॥

वृकः । चित् । अस्य । वारणः । उरामथिः । उरा । मथिः । आ । वयुनेषु । भूषति । सा । इमम् । नः । स्तोमम् । जुजुषाणः । आ । गहि । इन्द्र । प्र । चित्रया । धिया ॥१६९२॥

Samveda - Mantra Number : 1692
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 18; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(अस्य) इस परमेश्वर के (वयुनेषु) प्रज्ञानों में (उरामथिः) हृदयदुःखदायक (वारणः) मार्ग रोकने वाला लुटेरा (वृकः) चौर (चित्) भी (आ—भूषति) सीधा हो जाता है (सः) वह सर्वशक्तिमान् (इन्द्र) परमेश्वर ! तू (नः) हमारे (इमम्) इस (स्तोमम्) स्तोत्र को (जुजुषाणः) स्वीकृत करता हुआ (चित्रया) विचित्र (धिया) बुद्धि वा कर्म से (आगहि) प्राप्त हो॥
क्रूरकर्मी चोर डाकू लुटेरे भी जिस परमेश्वर के सामने सीधे होकर निजकर्म-फल भोग में परतन्त्र हो जाते हैं, वह सर्वशक्तिमान् जगदीश्वर हमारी पुकार सुने और हमको विचित्र बुद्धि वा कर्म करने का पुरुषार्थ देवें॥
Footnote
ऋग्वेद ८। ६६। ८ में भी॥