Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1674

1875 Mantra
Devata- विष्णुर्देवो वा Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣡तो꣢ दे꣣वा꣡ अ꣢वन्तु नो꣣ य꣢तो꣣ वि꣡ष्णु꣢र्विचक्र꣣मे꣢ । पृ꣣थिव्या꣢꣫ अधि꣣ सा꣡न꣢वि ॥१६७४॥

अ꣡तः꣣ । दे꣣वाः꣢ । अ꣣वन्तु । नः । य꣡तः꣢꣯ । वि꣡ष्णुः꣢꣯ । वि꣣चक्रमे꣢ । वि꣣ । चक्रमे꣢ । पृ꣣थिव्याः꣢ । अ꣡धि꣢꣯ । सा꣡न꣢꣯वि ॥१६७४॥

Mantra without Swara
अतो देवा अवन्तु नो यतो विष्णुर्विचक्रमे । पृथिव्या अधि सानवि ॥

अतः । देवाः । अवन्तु । नः । यतः । विष्णुः । विचक्रमे । वि । चक्रमे । पृथिव्याः । अधि । सानवि ॥१६७४॥

Samveda - Mantra Number : 1674
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 18; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(विष्णुः) परमेश्वर ने (यत्) जिस कारण (पृथिव्याः) पृथिवी के (अधि) ऊपर (सानवि) उच्च प्रदेश में भी (विचक्रमे) विशेष करके व्याप्त किया हुआ है (अतः) इस कारण परश्मेश्वराऽधिष्ठितता से (देवाः) पृथिवी आदि लोकलोकान्तर (नः) हमारी (अवन्तु) रक्षा करें॥
Footnote
ऋ० १। २२। १६ का पाठभेद संस्कृत भाष्य में देखिये॥