Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 1671

1875 Mantra
Devata- विष्णुः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
वि꣢ष्णोः꣣ क꣡र्मा꣢णि पश्यत꣣ य꣡तो꣢ व्र꣣ता꣡नि꣢ पस्प꣣शे꣢ । इ꣡न्द्र꣢स्य꣣ यु꣢ज्यः꣣ स꣡खा꣢ ॥१६७१॥

वि꣡ष्णोः꣢꣯ । क꣡र्मा꣢꣯णि । प꣣श्यत । य꣡तः꣢꣯ । व्र꣣ता꣡नि꣢ । प꣣स्पशे । इ꣡न्द्र꣢꣯स्य । यु꣡ज्यः꣢꣯ । स꣡खा꣢꣯ । स । खा꣣ ॥१६७१॥

Mantra without Swara
विष्णोः कर्माणि पश्यत यतो व्रतानि पस्पशे । इन्द्रस्य युज्यः सखा ॥

विष्णोः । कर्माणि । पश्यत । यतः । व्रतानि । पस्पशे । इन्द्रस्य । युज्यः । सखा । स । खा ॥१६७१॥

Samveda - Mantra Number : 1671
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 18; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
हे मनुष्यो ! (विष्णोः) व्यापक अदृश्य भी परमेश्वर के (कर्माणि) कर्मों को (पश्यत) देखो (यतः) जिन कर्मों की सहायता से (व्रतानि) मनुष्य धर्मकर्मों को (पस्पशे) अनुष्ठान की रीति से करता है, वह विष्णु (इन्द्रस्य) जीवात्मा का (युज्यः) योग्य (सखा) हितकारी मित्र है।
Footnote
ऋग्वेद १। २२। १९ में और यजुः ६—४ में भी॥